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  • 2026-04-25

National News: तेल कंपनियों का भारी घाटा, पेट्रोल पर 20 और डीजल पर 100 रुपये का नुकसान, फिर भी क्यों नहीं बढ़ रहे दाम?

National News: ईरान-इजरायल युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait Of Hormuz) में तेल की सप्लाई बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है. जो कच्चा तेल पिछले साल 70 डॉलर प्रति बैरल था, वह अब 113 डॉलर के पार पहुंच चुका है. पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने का फैसला किया है. पिछले चार वर्षों से देश में ईंधन के दाम लगभग फ्रीज हैं, जिसका पूरा बोझ वर्तमान में सरकारी तेल कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) उठा रही हैं.

कैसे मुमकिन है 100 रुपये का घाटा?
यह आंकड़ा पहली नजर में चौंकाने वाला लगता है कि जब डीजल की कीमत ही 90 रुपये के आसपास है, तो घाटा 100 रुपये कैसे हो सकता है? दरअसल, यह अंडर-रिकवरी का तकनीकी खेल है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की जो मौजूदा कीमत है, उसके हिसाब से भारत में डीजल की असल कीमत करीब 190 रुपये होनी चाहिए, लेकिन जनता को यह 90 रुपये में मिल रहा है. तेल कंपनियां इसे इंपोर्ट पैरिटी प्राइस (आयात समानता मूल्य) के आधार पर गणना करती हैं. यानी जिस कीमत पर तेल खरीदा जा रहा है और जिस पर बेचा जा रहा है, उसका अंतर ही यह भारी नुकसान है.

पुराने मुनाफे से हो रही घाटे की भरपाई
कंपनियां यह नुकसान इसलिए झेल पा रही हैं क्योंकि सरकार की रणनीति बैलेंसिंग पर टिकी है. जब कच्चे तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम होते हैं, तब कंपनियां कीमतों में कटौती नहीं करतीं और भारी मुनाफा (मार्जिन) कमाती हैं. उस संचित मुनाफे का इस्तेमाल अब इन कठिन समयों में घाटे की भरपाई के लिए किया जा रहा है. उदाहरण के लिए, यदि पहले कंपनियों ने 10 रुपये में तेल खरीदकर 90 रुपये में बेचा था, तो उस समय कमाए गए 80 रुपये के मार्जिन का उपयोग अब 100 रुपये के नुकसान को सहने के लिए किया जा रहा है.

एक्साइज ड्यूटी में कटौती और भविष्य की योजना
सरकार ने कंपनियों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में भी कटौती की है. इससे जनता के लिए दाम तो कम नहीं हुए, लेकिन कंपनियों का प्रति लीटर होने वाला नुकसान थोड़ा कम हो गया है. साथ ही, सरकार ने तेल के निर्यात पर अतिरिक्त टैक्स लगा दिया है ताकि घरेलू आपूर्ति प्रभावित न हो. पेट्रोलियम मंत्रालय ने उन खबरों को पूरी तरह फर्जी बताया है जिनमें चुनाव के बाद तेल की कीमतें 28 रुपये तक बढ़ने का दावा किया जा रहा था. फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है.
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