Grand Rath Yatra Of Jagannath Puri: झारखंड की राजधानी रांची में जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर भव्य रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है। इस यात्रा में प्रभु जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और माता सुभद्रा के विग्रह गर्भगृह से बाहर आते हैं और रथ पर सवार होकर मौसीबाड़ी जाते हैं। यहां नौ दिनों तक जगन्नाथ स्वामी अपनी मौसी के घर पर विश्राम करते हैं। इसके बाद 10वें दिन वापस रथ पर सवार होकर मुख्य मंदिर लौट आते है।
रथ यात्रा के पहले दिन और आखिरी दिन का काफी महत्व होता है। इन दोनों दिनों में प्रभु जगन्नाथ, माता सुभद्रा और

बड़े भाई बलभद्र के रथों को खींचने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। हजारों-लाखों भक्त भगवान के रथों को खींचकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह यात्रा प्रभु के प्रति भक्ति और एकता का प्रतीक है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रथ यात्रा में शामिल होने या भगवान के दर्शन करने मात्र से भक्तों के सभी पापों का नाश हो जाता है। इसके साथ ही भक्तों को जगन्नाथ स्वामी का आशीर्वाद मिलता है। इस दिव्य और भव्य यात्रा में भक्त बिना किसी भेदभाव और राग-द्वेष के शामिल होते हैं।
रथ यात्रा की शुरुआत
रथ यात्रा की शुरुआत को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं। एक पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता सुभद्रा ने अपने भाइयों भगवान बलभद्र और भगवान जगन्नाथ से नगर भ्रमण की इच्छा जाहिर की थी। इस पर दोनों भाइयों ने भव्य रथ का निर्माण करवाया और आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करने निकले।
रथ यात्रा का आयोजन
इस साल रथ यात्रा 27 जून शुक्रवार से शुरू होने वाली है और यह यात्रा नौ दिनों तक चलेगी, जो 5 जुलाई को समाप्त होगी। रांची स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर में रथ यात्रा के दौरान भव्य मेला लगता है, जिसका समापन घुरती रथ के दिन होता है।
रथ यात्रा में सबसे आगे प्रभु बलराम का रथ
रथ यात्रा में सबसे आगे प्रभु बलराम का रथ, बीच में बहन सुभद्रा का रथ और सबसे पीछे जगन्नाथ स्वामी का रथ होता है। यह यात्रा प्रभु के प्रति भक्ति और एकता का प्रतीक है और इसमें शामिल होने से भक्तों को प्रभु का आशीर्वाद मिलता है।
रांची में जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर भव्य रथ यात्रा का आयोजन एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है, जिसमें हजारों-लाखों भक्त शामिल होते हैं। यह यात्रा प्रभु के प्रति भक्ति और एकता का प्रतीक है और इसमें शामिल होने से भक्तों को प्रभु का आशीर्वाद मिलता है।