Jharkhand News: रांची से सामने आई एक अहम न्यायिक खबर में झारखंड हाईकोर्ट ने टाटा स्टील लिमिटेड को बड़ा झटका दिया है. अदालत ने इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC से जुड़े जीएसटी अधिनिर्णय आदेश को चुनौती देने वाली कंपनी की रिट याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि हाईकोर्ट अपील करने का मंच नहीं है और कर मामलों में तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है.
हाईकोर्ट ने साफ कहा, सीधे रिट याचिका नहीं, पहले अपनाएं वैधानिक अपील का रास्ता
मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता कंपनी ऐसा कोई असाधारण आधार पेश नहीं कर सकी, जिससे यह साबित हो कि वैधानिक अपील प्रक्रिया को दरकिनार कर सीधे हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की जाए. अदालत ने स्पष्ट किया कि कर विवादों में पहले निर्धारित अपीलीय मंच का उपयोग करना ही उचित और कानूनी रास्ता है.
टैक्स विवाद में कोर्ट की सीमा तय, तथ्य जांच और साक्ष्यों का मूल्यांकन रिट क्षेत्राधिकार में नहीं
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि हाईकोर्ट केवल न्यायिक समीक्षा की सीमित शक्तियों का उपयोग करता है, न कि अपीलीय अधिकार क्षेत्र का. इस मामले में अधिनिर्णय आदेश से जुड़े तथ्यों की जांच, साक्ष्यों का विश्लेषण और विवादित पहलुओं का पुनर्मूल्यांकन जरूरी था, जो रिट याचिका के दायरे में नहीं आता. इसलिए इस स्तर पर हस्तक्षेप करना उचित नहीं माना गया.
क्या था टाटा स्टील का पक्ष, कंपनी ने कार्रवाई को बताया अधिकार क्षेत्र से बाहर
पूरा मामला CGST अधिनियम की धारा 74 के तहत पारित आदेश से जुड़ा है, जिसमें धोखाधड़ी, गलत बयानबाजी या तथ्यों को छिपाने जैसे गंभीर आरोप शामिल होते हैं. टाटा स्टील ने दलील दी थी कि उनके मामले में ऐसे कोई तत्व मौजूद नहीं थे, इसलिए विभाग की कार्रवाई अधिकार क्षेत्र से बाहर है. साथ ही कंपनी ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का भी हवाला दिया.
याचिका खारिज, लेकिन अपील के लिए मिला चार हफ्ते का समय
हाईकोर्ट ने रिट याचिका खारिज करते हुए टाटा स्टील को राहत भी दी. अदालत ने कंपनी को चार सप्ताह के भीतर वैधानिक अपील दायर करने की अनुमति दी है. साथ ही यह भी निर्देश दिया कि यदि निर्धारित समय में अपील की जाती है, तो अपीलीय प्राधिकारी इसे केवल देरी के आधार पर खारिज नहीं करेंगे, बल्कि मामले को गुण-दोष के आधार पर सुनेंगे.
झारखंड हाईकोर्ट का यह फैसला साफ संकेत देता है कि कर विवादों में कानूनी प्रक्रिया और निर्धारित अपीलीय व्यवस्था का पालन अनिवार्य है. अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रिट याचिका का इस्तेमाल शॉर्टकट के रूप में नहीं किया जा सकता. यह निर्णय भविष्य में इसी तरह के मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर माना जाएगा.