Hazaribagh News: हजारीबाग नगर निगम इन दिनों विकास कार्यों के बजाय महापौर अरविंद कुमार राणा और नगर आयुक्त के बीच जारी आपसी खींचतान को लेकर सुर्खियों में है. महापौर ने नगर आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सीधे मुख्यमंत्री से शिकायत की है और उन पर संवैधानिक अधिकारों के हनन का गंभीर आरोप लगाया है. इस टकराव ने निगम की कार्यप्रणाली को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है, जिससे शहर की व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं.
वाहन और स्टाफ को लेकर उभरा विवाद
महापौर का आरोप है कि उन्हें अब तक आधिकारिक वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया है और कार्यालय के लिए जरूरी कर्मचारी भी नहीं दिए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि एक पत्र टाइप करने के लिए दिया गया था, जो 15 दिनों के बाद भी तैयार नहीं हुआ, वहीं उनके निजी वाहन को मुख्य द्वार पर खड़ा करने से भी रोका जा रहा है. दूसरी ओर, नगर आयुक्त का पक्ष है कि महापौर को पहले वाहन दिया गया था, जिसे उन्होंने खुद वापस कर नए वाहन की मांग की थी.
"रबड़ स्टैंप" बनाने की कोशिश और बोर्ड बैठक का अपमान
महापौर अरविंद कुमार राणा ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि उन्हें "रबड़ स्टैंप" बनाने की कोशिश की जा रही है और झारखंड म्युनिसिपल एक्ट 2011 की अनदेखी हो रही है. उन्होंने 25 अप्रैल की बोर्ड बैठक का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि बैठक के बीच में ही नगर आयुक्त का जिम्मेदारी सौंपकर निकल जाना बोर्ड की गरिमा का अपमान है. इसके अलावा, महापौर ने यह भी दावा किया कि उन्हें मीडिया से बात करने के लिए भी अनुमति लेने को कहा जा रहा है, जो लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है.
संसाधनों की बर्बादी और उच्चस्तरीय जांच की मांग
निगम की अव्यवस्था पर सवाल उठाते हुए महापौर ने कहा कि करोड़ों के वाहन बिना उपयोग के खराब हो रहे हैं और निगम कबाड़खाना बनता जा रहा है. उन्होंने म्युनिसिपल एक्ट की धारा 33 के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए फाइलों की समीक्षा में बाधा डालने की बात कही है. महापौर ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और साफ कर दिया है कि वे अपने अधिकारों के लिए पीछे नहीं हटेंगे, जिससे यह विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है.