Ranchi News : झारखंड में जनगणना 2027 को लेकर सरना धर्म कोड की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आगामी जनगणना में सरना धर्म को अलग कोड के रूप में शामिल करने की मांग की है।
आदिवासी पहचान और अधिकारों से जुड़ा मुद्दा, लंबे समय से उठती रही है मांग
कांग्रेस का कहना है कि सरना धर्म आदिवासी समाज की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है। पार्टी नेताओं ने तर्क दिया कि वर्तमान जनगणना व्यवस्था में सरना धर्म के लिए अलग कॉलम नहीं होने के कारण आदिवासी समुदाय की वास्तविक धार्मिक पहचान दर्ज नहीं हो पाती।
यह मांग नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से आदिवासी संगठनों और राजनीतिक दलों द्वारा उठाई जाती रही है। झारखंड विधानसभा भी पहले सरना धर्म को अलग कोड देने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज चुकी है।
नीतिगत फैसलों पर पड़ेगा असर, 2027 जनगणना से जुड़ी उम्मीदें
विशेषज्ञों और नेताओं का मानना है कि जनगणना केवल जनसंख्या गिनने का माध्यम नहीं, बल्कि सरकारी नीतियों और योजनाओं का आधार भी होती है। ऐसे में यदि सरना धर्म को अलग पहचान मिलती है, तो आदिवासी समुदाय के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए योजनाएं अधिक प्रभावी ढंग से बनाई जा सकेंगी।
गौरतलब है कि भारत की 2027 की जनगणना दो चरणों में हो रही है, जिसमें डिजिटल प्रक्रिया भी शामिल है। ऐसे में अलग धर्म कोड शामिल करना तकनीकी रूप से संभव माना जा रहा है।
यह मुद्दा झारखंड ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों में रहने वाले आदिवासी समुदाय की पहचान और अधिकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय बन चुका है।