Jharkhand: झारखंड सरकार के वित्त विभाग ने एक अहम प्रशासनिक फैसला लेते हुए राज्य के 143 पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों को एसीपी (Assured Career Progression) और एमएसीपी (Modified Assured Career Progression) योजना का लाभ देने की मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के तहत संबंधित पुलिसकर्मियों के वेतन स्तर में वृद्धि को स्वीकृति प्रदान की गई है। यह लाभ उन कर्मियों को दिया गया है जिन्होंने अपनी सेवा अवधि में 10, 20 या 30 वर्षों का नियमित कार्यकाल पूरा कर लिया है। खासतौर पर बड़ी संख्या में सहायक अवर निरीक्षक (ASI) को द्वितीय एमएसीपी के तहत लेवल-6 में प्रोन्नति दी गई है, जिससे उनके वेतन और सेवा स्थिति में सुधार होगा। वहीं कुछ मामलों में सेवानिवृत्त और दिवंगत पदाधिकारियों के भी लंबित प्रकरणों को सुधारते हुए उन्हें लेवल-7 तक का लाभ प्रदान किया गया है। यह पूरा निर्णय केंद्रीय चयन पर्षद सह स्क्रीनिंग समिति की 11 मार्च को हुई बैठक में लिए गए प्रस्ताव के आधार पर लागू किया गया है।
पिछली तिथियों से संशोधन कर दूर की गई विसंगतियां
विभाग ने इस प्रक्रिया के दौरान कई पुराने मामलों की समीक्षा करते हुए वेतनमान और ग्रेड पे में सुधार किया है। जिन कर्मियों ने पीटीसी (Police Training Course) की पूरक परीक्षा उत्तीर्ण की थी या जिनके मामलों में पहले से कोई विसंगति रह गई थी, उन्हें भी राहत देते हुए उनके वेतन और लेवल में पिछली तिथियों से संशोधन किया गया है। इस फैसले का लाभ केवल एक-दो इकाइयों तक सीमित नहीं है, बल्कि विशेष शाखा, रेल धनबाद, झारखंड पुलिस वायरलेस और पदमा व हजारीबाग जैसे प्रशिक्षण केंद्रों में कार्यरत कर्मियों को भी इसका फायदा मिला है। इससे लंबे समय से लंबित मामलों का समाधान हुआ है और पुलिसकर्मियों के बीच संतोष का माहौल देखने को मिल रहा है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद तेज हुई प्रक्रिया
गौरतलब है कि हाल ही में झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया था कि एसीपी और एमएसीपी के लंबित लाभ से वंचित पुलिसकर्मियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर उनका हक दिया जाए। अदालत ने आठ सप्ताह के भीतर सभी पात्र कर्मियों को लाभ सुनिश्चित करने के साथ-साथ बकाया एरियर राशि का भुगतान करने का भी आदेश दिया था। इसी निर्देश के बाद सरकार की ओर से इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया गया और अब इसका परिणाम सामने आया है। यह निर्णय न केवल पुलिसकर्मियों के मनोबल को बढ़ाने वाला माना जा रहा है, बल्कि इससे उनकी आर्थिक स्थिति में भी सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है।