Assam Politics: असम की राजनीति में एक बार फिर हिमंत बिस्वा सरमा का दबदबा साबित हुआ है। भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने रविवार को सर्वसम्मति से उन्हें अपना नेता चुन लिया। इस फैसले के साथ ही राज्य की कमान लगातार दूसरी बार उनके हाथों में जाना तय हो गया है। राजधानी गुवाहाटी में 12 मई को सुबह 11 बजे एक भव्य समारोह में वे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहुंचने की संभावना है।
विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति, आठ विधायकों ने रखा नाम का प्रस्ताव
रविवार सुबह भाजपा विधायक दल की बैठक में हिमंत बिस्वा सरमा के नाम पर मुहर लगी। केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने आधिकारिक तौर पर उनके नाम की घोषणा करते हुए बताया कि आठ विधायकों ने सरमा के नाम का प्रस्ताव रखा था, जिसे सभी ने एक स्वर में स्वीकार कर लिया। बैठक में असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) जैसे सहयोगी दलों ने भी उनके नेतृत्व पर पूरा भरोसा जताया। पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद जे.पी. नड्डा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में यह पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई।
चुनावी नतीजों में प्रचंड जीत, भाजपा ने अकेले पार किया 80 का आंकड़ा
असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने भाजपा की जड़ों को राज्य में और गहरा कर दिया है। 126 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने अपने दम पर 82 सीटें जीतकर विपक्ष को काफी पीछे छोड़ दिया। सहयोगी दलों के साथ मिलकर एनडीए का आंकड़ा दो-तिहाई बहुमत के पार पहुंच गया है। विकास, बेहतर कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के नाम पर मिली यह जीत सीधे तौर पर हिमंत बिस्वा सरमा की लोकप्रियता और उनके काम करने के अंदाज पर जनता की मुहर मानी जा रही है।
शपथ ग्रहण की तैयारियां, पूर्वोत्तर से देश को संदेश देने की तैयारी
12 मई को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह केवल सरकार गठन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर में भाजपा की बढ़ती ताकत का प्रदर्शन भी होगा। इस समारोह में भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों के शामिल होने की उम्मीद है। विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद अब नई कैबिनेट के स्वरूप को लेकर चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि नई सरकार में राज्य के विभिन्न समुदायों और क्षेत्रों को संतुलित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की जाएगी।
कार्यवाहक से फिर पूर्णकालिक जिम्मेदारी तक का सफर
चुनाव परिणामों के बाद परंपरा के अनुसार सरमा ने अपना इस्तीफा राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य को सौंप दिया था और तब से वे कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर काम देख रहे थे। अब आधिकारिक चयन के बाद वे राज्यपाल से मुलाकात कर नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरमा के अगले कार्यकाल में असम में निवेश और रोजगार के नए अवसरों पर विशेष जोर रहेगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके।