West Bengal News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ा दावा ठोक दिया है. सोमवार को सुनवाई के दौरान टीएमसी ने कोर्ट को बताया कि राज्य में “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन” (SIR) के दौरान मतदाता सूची से जितने नाम काटे गए, कई सीटों पर जीत-हार का अंतर उससे भी कम है. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस दलील को सुनने के बाद टीएमसी को मामले में नया आवेदन (IA) दाखिल करने की अनुमति दे दी है.
वोटों की कटौती और जीत के अंतर का गणित
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने अदालत में तर्क दिया कि एसआईआर (SIR) के तहत हटाए गए वोटों का चुनाव परिणामों पर गहरा असर पड़ा है. वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंद्योपाध्याय ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि "एक उम्मीदवार उस क्षेत्र में महज 862 वोटों से हार गया, जबकि वहां की वोटर लिस्ट से 5,432 से ज्यादा लोगों के नाम हटा दिए गए थे." पार्टी का कहना है कि अगर ये वोट नहीं कटते, तो चुनावी नतीजे कुछ और ही होते.
35 लाख अपीलों का पेंडिंग होना गंभीर मुद्दा
TMC का दावा है कि टीएमसी और भाजपा के बीच कुल वोटों का अंतर करीब 32 लाख था, जबकि अपीलेट ट्रिब्यूनल के पास लगभग 35 लाख अपीलें अभी भी लंबित हैं. जस्टिस बागची ने इस पर टिप्पणी की कि यदि जीत का अंतर हटाए गए वोटर्स की संख्या से कम है, तो इस मामले की न्यायिक जांच की जरूरत हो सकती है. कोर्ट ने अब टीएमसी से उन सभी सीटों का पूरा ब्योरा मांगा है जहां इस तरह की विसंगतियां पाई गई हैं.
चुनाव आयोग ने दलीलों का किया विरोध
दूसरी ओर, चुनाव आयोग (EC) ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी के इन दावों का कड़ा विरोध किया है. आयोग का कहना है कि चुनाव परिणामों को चुनौती देने का सही तरीका "चुनाव याचिका" (Election Petition) है, न कि इस तरह की नई दलीलें पेश करना. हालांकि, बेंच ने टीएमसी को जरूरी दस्तावेजों और आंकड़ों के साथ एक स्वतंत्र आवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया है, ताकि यह देखा जा सके कि हटाए गए वोटर्स की वजह से चुनाव नतीजों पर कितना बड़ा प्रभाव पड़ा है.