Ramgarh: झारखंड में जमीन विवाद और भू-माफियाओं के बढ़ते हौसले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला रामगढ़ के कॉलेज कॉलोनी का है, जहां एक पीड़ित अपनी ही खरीदी हुई जमीन को बचाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है। पीड़ित गजाधर राम का आरोप है कि रसूखदार भू-माफियाओं ने उनकी रजिस्ट्री जमीन पर न केवल जबरन कब्जा किया, बल्कि प्रशासन की नाक के नीचे अवैध निर्माण भी खड़ा कर लिया है।
शिकायतों का अंबार, पर कार्रवाई सिफर
पीड़ित गजाधर राम ने बताया कि उन्होंने रामगढ़ कॉलेज कॉलोनी क्षेत्र में खाता संख्या 21, प्लॉट संख्या 225 और 226 के तहत कुल 6 डिसमिल जमीन खरीदी थी। जमीन पर कब्जा होने के बाद उन्होंने वर्ष 2025-26 के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), अंचल अधिकारी (CO), उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) को कई बार लिखित शिकायतें दीं। आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने के बावजूद मौके पर निर्माण कार्य नहीं रुकवाया गया, जिससे प्रशासनिक तत्परता पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच रिपोर्टों में विरोधाभास, पीड़ित ने उठाए सवाल
इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब अंचल अमीन की जांच रिपोर्ट और जमीन के नक्शे में रकवे (क्षेत्रफल) को लेकर स्पष्ट विरोधाभास पाया गया। पीड़ित का कहना है कि जांच रिपोर्टों में हेरफेर कर भू-माफियाओं को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। गजाधर राम के अनुसार, उनकी रजिस्ट्री जमीन के बावजूद पड़ोसी और भू-माफिया मिलीभगत कर उन्हें बेदखल करने की साजिश रच रहे हैं।
निष्पक्ष जांच और न्याय की गुहार
अपनी जीवन भर की कमाई से खरीदी जमीन को लुटता देख पीड़ित ने अब प्रशासन से आर-पार की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की किसी निष्पक्ष एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, अवैध रूप से किए गए निर्माण को तुरंत ध्वस्त किया जाए और इस खेल में शामिल दोषियों व भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। फिलहाल, इस मामले ने स्थानीय स्तर पर भू-राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा तेज कर दी है।