Seraikela: जिले के कुकड़ू प्रखंड अंतर्गत हेसालोंग गांव की रहने वाली गंगामनी महतो आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। कभी मजदूरी और खेती पर निर्भर रहने वाली गंगामनी ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के सहयोग से न केवल अपनी किस्मत बदली, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। आज वे मनिहारी और जूता-चप्पल के व्यवसाय से सालाना करीब 1 लाख 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
स्वयं सहायता समूह से बदला जीवन का नजरिया
गंगामनी का सफर साल 2020 में “यमुना आजीविका सखी मंडल” स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के साथ शुरू हुआ। इससे पहले उनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक खर्चों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती थी। समूह से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास जागा और उन्होंने नियमित बचत और आर्थिक प्रबंधन की बारीकियों को सीखा।
आर्थिक सहयोग और उद्यम की शुरुआत
अपने सपनों को धरातल पर उतारने के लिए गंगामनी को ग्राम संगठन के माध्यम से CIF (Community Investment Fund) मद से 50,000 रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। अपनी जमा पूंजी और इस ऋण राशि के मेल से उन्होंने मनिहारी और जूता-चप्पल की दुकान खोली।
- आय के स्रोत: वर्तमान में वे दुकान के साथ-साथ खेती से भी अतिरिक्त आय प्राप्त कर रही हैं।
- सरकारी योजनाओं का लाभ: उनके परिवार को झारखण्ड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना जैसी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिल रहा है।
ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं रोल मॉडल
गंगामनी महतो का कहना है कि समूह ने उन्हें व्यवसाय और ऋण प्रबंधन की बेहतर समझ दी है। आज वे आत्मनिर्भर होकर अपने बच्चों की शिक्षा और घर के खर्च बेहतर ढंग से चला रही हैं। उनकी इस मेहनत को देखकर गांव की अन्य महिलाएं भी प्रभावित हो रही हैं और स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए स्वयं सहायता समूहों से जुड़ रही हैं।