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  • 2025-04-12

Economy News: IT Sector के Stocks में निवेश से पहले जान लें ये 3 बड़े खतरे, वरना हो सकता है नुकसान!

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New Delhi: बीते 2 अप्रैल को रेसिप्रोकल टैरिफ लागू होने के बाद से भारत के आईटी सेक्टर को सबसे अधिक नुकसान हुआ है. दो अप्रैल के बाद से निफ़्टी आईटी इंडेक्स 8 फीसदी से गिर चुका है यानी पांच ट्रेडिंग सत्र में आईटी सेक्टर के स्टॉक बुरी तरह से पीटे हैं. हालांकि 9 अप्रैल की देर रात को ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ को अगले 90 दिनों तक टालने का ऐलान किया है जिसके बाद आईटी सेक्टर ने थोड़ी राहत ली है. शुक्रवार के सत्र में निफ़्टी आईटी इंडेक्स में 2 फीसदी तक की बढ़त भी देखी गई है. हालांकि अभी भी आईटी सेक्टर के लिए तीन बड़े खतरे हैं जो आईटी सेक्टर के स्टॉक्स को नीचे गिरा सकते है.

 

दो अप्रैल से रेसिप्रोकल टैरिफ ऐलान बाद भले ही ट्रंप ने 9 अप्रैल के दिन चीन को छोड़कर के दूसरे देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ टालने का ऐलान कर दिया है लेकिन अभी भी अमेरिका ने दूसरे देशों पर 10 फ़ीसदी का बेसलाइन टैरिफ बनाए रखा है इसके अलावा सेक्टर आधारित टैरिफ भी लागू है. 90 दिनों बाद दोबारा टैरिफ लागू होने का खतरा अभी पूरी तरह से नहीं टला है. कुल मिलाकर टैरिफ को लेकर के अनिश्चितता बनी हुई है.

 

 

अमेरिका में मंदी का खतरा

दूसरी तरफ अमेरिका में टैरिफ की घोषणाओं के बाद से मंदी आने की आशंका और गहरी होती जा रही है. अमेरिका में मंदी आने से अमेरिकी आईटी कंपनियां अपने बजट खर्च और आउटसोर्सिंग प्रोजेक्ट को टाल सकती है. जिससे भारत के आईटी कंपनियों को नुकसान पहुंचेगा. दरअसल भारत की आईटी कंपनियों का बहुत बड़ा बिजनेस अमेरिका के क्लाइंट से आता है. अमेरिकी क्लाइंट से कम बिजनेस का मिलना भारतीय आईटी कंपनियों के लिए बुरी खबर है.

 

 

 

हाल में ही अमेरिका के रक्षा सचिव ने आईटी सर्विस से जुड़ी हुई करीब 5.1 बिलियन डॉलर की डील्स को रद्द कर दिया है. इस डील को कैंसिल करने के पीछे वजह बताई गई कि अमेरिकी सरकार थर्ड पार्टी कंसल्टेंट्स पर बेमतलब का खर्च नहीं करना चाहती है इस डील के कैंसिल होने के बाद बड़ा संकेत मिल रहा है कि अमेरिकी सरकार आईटी सर्विस से जुड़े हुए आउटसोर्सिंग प्रोजेक्ट को डॉमेस्टिक मार्केट की कंपनियों से ही करवाना चाहती है जिसका असर उन प्रोजेक्ट्स पर भी पड़ सकता है जो भारत के आईटी कंपनी को आउटसोर्स किए गए हैं.

 

 

अर्निंग सीजन और महंगा वैल्यूएशन

वैश्विक मोर्चे पर टेंशन होने के साथ घरेलू मोर्चे पर भी आईटी सेक्टर के लिए बुरी हालत है एक्सपर्ट्स के द्वारा अनुमान जताया गया है कि फाइनेंशियल ईयर 2025 का मार्च तिमाही का अर्निंग सीजन भी आईटी सेक्टर के लिए कमजोर रह सकता है जिसकी शुरुआत भी हो चुकी है. गुरुवार को टीसीएस ने अपना तिमाही रिजल्ट पेश किया है जो बाजार के लगाए गए अनुमान से कम है हाल में ही इंफोसिस ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ में 1–3 फ़ीसदी तक रहने का अनुमान दिया. यह रेवेन्यू ग्रोथ FY25 के मुकाबले सपाट है. इसके अलावा आईटी सेक्टर की कंपनियों के लिए वैल्यूएशन रिस्क भी बना हुआ है.

 

कुल मिलाकर के अमेरिकी टैरिफ की अनिश्चितता, अमेरिका में मंदी से आईटी सेक्टर पर पड़ने वाले प्रभाव, अर्निंग सीजन और आईटी कंपनियों का वैल्यूएशन ये सारे बड़े खतरे है जो आईटी सेक्टर के स्टॉक को प्रभावित कर सकते हैं इसलिए आईटी सेक्टर में सोच समझकर निवेश करने का फैसला लें.

 
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