Jamshedpur: जमशेदपुर के खतरनाक हो चुके लक्ष्मी मेन्शन भवन मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की अदालत में हुई, जहां कोर्ट ने राज्य सरकार और जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमेटी से जवाब मांगा है। अदालत ने दोनों पक्षों को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश भी दिया है।
DC से कोर्ट का सवाल- आदेश के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
सुनवाई के दौरान जमशेदपुर के उपायुक्त राजीव रंजन वर्चुअल माध्यम से कोर्ट में उपस्थित हुए। कोर्ट ने उनसे पूछा कि जब JNAC ने दो महीने पहले ही भवन खाली कराने और ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया था, तो अब तक उस पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इस पर उपायुक्त की ओर से अदालत को बताया गया कि भवन में रहने वाले कुछ किरायेदारों ने अब तक मकान खाली नहीं किया है। प्रशासन ने कहा कि कोर्ट के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
NIT की जांच में भवन को बताया गया खतरनाक
राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि राज्य सरकार और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर की रिपोर्ट में लक्ष्मी मेन्शन भवन को जर्जर और खतरनाक घोषित किया गया है। इसके बाद JNAC ने 25 मार्च 2026 को भवन खाली कराने और ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था।
“कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा”
मामले में याचिकाकर्ता दुमकेश्वर महतो की ओर से अदालत को बताया गया कि लक्ष्मी मेन्शन भवन काफी जर्जर हो चुका है और उसके कभी भी गिरने की आशंका बनी हुई है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि इस खतरनाक भवन को जल्द ध्वस्त कराया जाना जरूरी है, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
कोर्ट ने अधिकारियों से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
अदालत ने जमशेदपुर के डिप्टी अर्बन कमिश्नर और अन्य अधिकारियों से 25 मार्च 2026 के आदेश के अनुपालन को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने का निर्देश भी दिया है।
अगली सुनवाई में पेश होगी स्थिति रिपोर्ट
कोर्ट ने कुछ प्रतिवादियों के खिलाफ दस्ती नोटिस जारी करने की अनुमति देते हुए याचिकाकर्ता के वकील को व्यक्तिगत रूप से नोटिस तामील कराने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई में प्रशासन की ओर से अब तक की कार्रवाई और भवन की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी।