Twisha Murder Case: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में रहने वाली 33 वर्षीय मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला लगातार सुर्खियों में है. दिसंबर 2025 में भोपाल के एक रसूखदार परिवार में शादी के महज पांच महीने बाद ही 12 मई 2026 की रात को ट्विशा का शव उनके ससुराल में फंदे से लटका मिला था. मृतका के परिजनों ने ससुराल पक्ष पर 1.5 करोड़ के दहेज की मांग, मानसिक प्रताड़ना और हत्या के गंभीर आरोप लगाए हैं. इस मामले में अब तक के तीन बड़े कानूनी घटनाक्रम सामने आए हैं,
पहला यह कि मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए CBI जांच की आधिकारिक सिफारिश कर दी है.दूसरा, पिछले 10 दिनों से फरार चल रहे मुख्य आरोपी पति समर्थ सिंह को जबलपुर जिला अदालत परिसर से पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. इसके अतिरिक्त, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने भी आरोपी वकील समर्थ सिंह का वकालत लाइसेंस तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. आइए विस्तार से जानते है क्या कुछ था पूरा मामला और पूरे घटनाक्रम को समझते है.
घटना के दिन की टाइमलाइन और अंतिम 15 मिनट का घटनाक्रम
जांच टीमों और साइबर सेल द्वारा खंगाले गए कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर पुलिस और परिजनों द्वारा घटना की रात 12 मई की एक टाइमलाइन सामने रखी गई है. परिजनों के मुताबिक, रात 10:05 बजे ट्विशा ने नोएडा में रह रही अपनी मां को एक डिस्ट्रेस कॉल किया, जिसमें उन्होंने रोते हुए ससुराल वालों द्वारा किए जा रहे कथित व्यवहार की बात कही. इसी बातचीत के दौरान फोन अचानक कट गया. इसके बाद जब रात 10 बज कर 15 मिनट पर मायके वालों ने वापस फोन किया, तो वह फोन कथित तौर पर ससुराल पक्ष के सदस्यों द्वारा उठाया गया. इसके ठीक पांच मिनट बाद, यानी रात 10 बजकर 20 मिनट पर ससुराल वालों ने ट्विशा के माता-पिता को दोबारा कॉल कर सूचना दी कि ट्विशा अचेत अवस्था में हैं और वे उन्हें अस्पताल ले जा रहे हैं. अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने ट्विशा को मृत घोषित कर दिया. घटना के बाद सामने आए एक सीसीटीवी (CCTV) फुटेज में ट्विशा को मौत से कुछ घंटे पहले एक ब्यूटी पार्लर में पूरी तरह सामान्य स्थिति में देखा गया था, जिसे परिजनों ने अपनी जांच की मांग का आधार बनाया है.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के निष्कर्ष और फॉरेंसिक प्रक्रिया पर विवाद
AIIMS Bhopal द्वारा जारी की गई प्राथमिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण एंटी-मॉर्टम हैंगिंग यानी फांसी की वजह से दम घुटना बताया गया है. हालांकि, परिजनों का दावा है कि इस रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी दर्ज है कि ट्विशा के शरीर, कलाई और सिर के स्कैल्प पर कुंद चोटों के निशान (Blunt force injuries) पाए गए हैं, जो मौत से ठीक पहले किसी शारीरिक संघर्ष की ओर इशारा करते हैं. इसके अतिरिक्त, इस मामले में शुरुआती जांच के दौरान एक प्रक्रियात्मक चूक भी सामने आई. पुलिस ने कथित तौर पर आत्महत्या के लिए इस्तेमाल की गई बेल्ट (लिगेचर मटेरियल) को समय पर पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों को नहीं सौंपा गया था. घटना के दो दिन बाद इस बेल्ट को मालखाने से निकालकर डॉक्टरों के पास भेजा गया, जिसे भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने भी जांच में एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही के रूप में स्वीकार किया है. मेडिकल रिकॉर्ड्स से यह भी पुष्ट हुआ है कि मौत से महज एक सप्ताह पहले ट्विशा का गर्भपात हुआ था.
कॉल डिटेल्स (CDR) की जांच और दोनों पक्षों के दवाओं पर अब चर्चा करते है
साइबर सेल की तकनीकी जांच में ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह जो एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं, उनकी भूमिका को लेकर परिजनों ने कई सवाल उठाए हैं. परिजनों का आरोप है कि कॉल डिटेल्स के विश्लेषण से पता चला है कि ट्विशा की मौत के तुरंत बाद, गिरिबाला सिंह ने पुलिस या एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को सूचित करने के बजाय, कथित रूप से 46 अलग - अलग प्रभावशाली लोगों और तकनीकी जानकारों को फोन किए थे. परिजनों का आरोप है कि रसूख का इस्तेमाल कर साक्ष्यों को प्रभावित करने के उद्देश्य से ये फोन कॉल्स किए गए थे. हालांकि, स्थानीय अदालत से अग्रिम जमानत मिलने के बाद गिरिबाला सिंह ने मीडिया के सामने आकर इन आरोपों का खंडन किया और बयान दिया था कि ट्विशा को व्यवहार संबंधी विकार जिससे अंग्रेजी में Behavioral Disorder कहा जाता है, वो था और वे अवसाद व नशीली दवाओं का सेवन करती थीं. दूसरी ओर, भोपाल पुलिस कमिश्नर ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया है कि ट्विशा की मेडिकल हिस्ट्री या प्राथमिक जांच में किसी भी प्रकार के ड्रग अब्यूज, नशे के सेवन के प्रामाणिक सबूत नहीं मिले हैं.
वर्तमान कानूनी स्थिति, कहां तक आखिर पहुंच पाए सीबीआई जांच और दोबारा पोस्टमार्टम का आदेश
आज, 22 मई 2026 तक इस मामले ने पूरी तरह से एक नया कानूनी मोड़ ले लिया है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल जिला अदालत के पुराने फैसले को पलटते हुए ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम Re-Autopsy कराने की अनुमति दे दी है. परिजनों की निष्पक्ष जांच की मांग को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने आदेश दिया है कि दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की एक विशेष फॉरेंसिक टीम भोपाल आकर शव का दोबारा परीक्षण करेगी. इसी कारण से ट्विशा का शव पिछले आठ दिनों से भोपाल एम्स की मोर्चरी के फ्रीजर में सुरक्षित रखा हुआ है. इसके साथ ही, चौतरफा कानूनी दबाव के चलते ₹30,000 के इनामी और फरार चल रहे पति समर्थ सिंह को आज पुलिस ने कस्टडी में ले लिया है. मध्य प्रदेश सरकार के गृह विभाग ने भी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आधिकारिक तौर पर इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपने के लिए केंद्र सरकार को सिफारिश भेज दी है. आरोपियों के खिलाफ वर्तमान में भोपाल के कटारा हिल्स थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2) (दहेज मृत्यु) और 85 (क्रूरता) के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है.