National News: महाराष्ट्र से महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर दो ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है. एक तरफ पंढरपुर की इंजीनियरिंग छात्रा न्याय की उम्मीद टूटने के बाद जिंदगी हार गई, तो दूसरी तरफ भंडारा में 5 साल की मासूम के साथ हुई बर्बरता ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया. दोनों मामलों के बाद पुलिस व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
रिश्तेदार पर शोषण का आरोप, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से टूटी छात्रा
पंढरपुर तालुका के पटवर्धन कुरोली इलाके की रहने वाली एक छात्रा इंदापुर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही थी. पिता का साया पहले ही उसके सिर से उठ चुका था और उसकी मां ने बेहद मुश्किल हालात में बेटी को पढ़ाकर आगे बढ़ाने का सपना देखा था. आरोप है कि परिवार के ही एक विवाहित रिश्तेदार ने छात्रा का शोषण किया. पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए 11 अप्रैल को करकंब पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी. लेकिन परिवार का आरोप है कि प्रभावशाली आरोपी के खिलाफ पुलिस लगातार कार्रवाई टालती रही और गिरफ्तारी नहीं की गई.
समाज के तानों और पुलिस की देरी से टूट गई पीड़िता
लगातार थाने के चक्कर लगाने और समाज की बातों से परेशान होकर छात्रा मानसिक रूप से टूट गई. न्याय की उम्मीद खत्म होने के बाद उसने टॉयलेट साफ करने वाला एसिड पी लिया. हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन आरोप है कि वहां भी पर्याप्त इलाज और सुविधाएं नहीं मिलीं. परिजनों का कहना है कि अस्पताल ने गंभीर हालत के बावजूद छात्रा को वापस घर भेज दिया. घर लौटने के बाद उसकी तबीयत और बिगड़ती गई और आखिरकार उसकी मौत हो गई.
बेटी की मौत के बाद थाने में शव रखकर परिवार ने किया विरोध
बेटी की मौत से गुस्साए परिवार ने उसका शव सीधे करकंब थाने के मुख्य हॉल में रख दिया. परिजनों ने साफ कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा. करीब दो घंटे तक थाने में तनावपूर्ण माहौल बना रहा. बढ़ते दबाव के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया और मामले में हत्या के प्रयास तथा आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ीं.
दूसरी घटना विदर्भ के भंडारा जिले के लखनी थाना क्षेत्र की है. यहां मजदूरी के लिए बाहर गए माता पिता की गैरमौजूदगी में 5 साल की बच्ची घर पर अकेली थी. इसी दौरान गांव के एक युवक ने उसे बहला फुसलाकर पास के सुनसान खेत में ले गया. आरोप है कि वहां बच्ची के साथ मारपीट की गई और उसके साथ बेहद क्रूर तरीके से यौन उत्पीड़न किया गया. शाम को घायल और डरी हुई बच्ची किसी तरह घर पहुंची और रोते हुए मां को पूरी घटना बताई.
पुलिस ने आरोपी आशीष तेम्भुर्ने को देर रात किया गिरफ्तार
बच्ची की हालत देखकर परिवार तुरंत लखनी पुलिस स्टेशन पहुंचा. शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आई और महिला अधिकारियों की मौजूदगी में मामले की जांच शुरू की गई. पुलिस ने देर रात आरोपी आशीष तेम्भुर्ने, उम्र 30 वर्ष, को गिरफ्तार कर लिया. उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है.
दोनों घटनाओं के बाद पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल
इन दोनों मामलों ने ग्रामीण और अर्ध शहरी इलाकों में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर पंढरपुर मामले में समय रहते कार्रवाई होती, तो एक होनहार छात्रा की जान बच सकती थी. भंडारा मामले में जहां पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना हो रही है, वहीं पंढरपुर के करकंब पुलिस स्टेशन के अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं. स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और निलंबन की मांग उठाई है. इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर महिलाओं और बच्चियों को सुरक्षित माहौल देने के दावे जमीन पर कब तक सच साबित होंगे.