Jharkhand: भारतीय जनता पार्टी झारखंड इकाई ने संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत बनाने के उद्देश्य से बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया है। प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के निर्देश पर राज्य के विभिन्न संगठनात्मक जिलों के लिए नए जिला प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। पार्टी की ओर से जारी सूची में वरिष्ठ नेताओं के साथ सक्रिय कार्यकर्ताओं को भी अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
रांची और कोल्हान क्षेत्र में कई नेताओं को नई जिम्मेदारी
नई व्यवस्था के तहत रांची महानगर का प्रभार भरत यादव को दिया गया है, जबकि रांची पूर्वी की जिम्मेदारी अशोक शर्मा और रांची पश्चिमी का दायित्व नंदजी प्रसाद को सौंपा गया है। वहीं लोहरदगा में अमित सिंह, गुमला में राकेश भास्कर और सिमडेगा में सुबोध सिंह गुड्डू को प्रभारी बनाया गया है।
कोल्हान क्षेत्र में भी पार्टी ने कई अहम नियुक्तियां की हैं। खूंटी में सुनीता सिंह, चाईबासा में विनय जायसवाल और चक्रधरपुर में शैलेन्द्र सिंह को जिम्मेदारी दी गई है। सरायकेला-खरसावां के लिए मनोज मिश्रा, जमशेदपुर महानगर के लिए बबन गुप्ता तथा पूर्वी सिंहभूम के लिए दिनेश कुमार को जिला प्रभारी नियुक्त किया गया है।
पलामू प्रमंडल और उत्तरी जिलों में भी बदलाव
भाजपा नेतृत्व ने पलामू संभाग और आसपास के जिलों में भी नई टीम तैयार की है। गढ़वा में पंकज सिंह, पलामू में शशिभूषण भगत, लातेहार में मनीर उरांव और चतरा में अमरदीप यादव को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके अलावा हजारीबाग में किशुन दास, रामगढ़ में सुरेन्द्र महतो और कोडरमा में प्रवीण कुमार मेहता को प्रभारी बनाया गया है। गिरिडीह महानगर की कमान डॉ. संजय सिंह को मिली है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र की जिम्मेदारी सरोज सिंह को दी गई है। बोकारो में सत्यनारायण सिंह, धनबाद महानगर में संजीव विजयवर्गीय और धनबाद ग्रामीण में दिलीप वर्मा को संगठनात्मक दायित्व सौंपा गया है।
संताल परगना में भी नई टीम तैयार
संताल परगना क्षेत्र में पार्टी ने जामताड़ा के लिए प्रदीप साहू, दुमका के लिए अशोक उपाध्याय, देवघर के लिए यदुनन्दन पाठक, गोड्डा के लिए सुरेश साहू, साहेबगंज के लिए अमृत पांडेय और पाकुड़ के लिए निवास मंडल को जिला प्रभारी बनाया है।
संगठन को मजबूत करने पर जोर
प्रदेश नेतृत्व का मानना है कि नई नियुक्तियों से संगठनात्मक गतिविधियों में तेजी आएगी और बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने में मदद मिलेगी। भाजपा ने संकेत दिया है कि आने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों और चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए यह फेरबदल किया गया है, ताकि कार्यकर्ताओं और नेतृत्व के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।