Jamtara Crime News: झारखंड के जामताड़ा में पैर पसार चुके साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस को एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. कानून व्यवस्था ने एक सोचे-समझे तरीके से चल रहे ठगी के पूरे नेटवर्क को बेनकाब कर दिया है. पुलिस की एक संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर जाल बिछाकर तीन शातिर ठगों को दबोच लिया. पकड़े गए आरोपियों में दो सगे भाई भी शामिल हैं, जो काफी समय से इस काले कारोबार में सक्रिय थे. साइबर डीएसपी अमित रविदास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि एसपी शंभु कुमार सिंह को मिली सटीक जानकारी के बाद करमाटांड़ इलाके के पिंडारी, सकलपुर और तिलैया गांवों में एक साथ दबिश दी गई थी. इस पूरी कार्रवाई को साइबर थाना और स्थानीय करमाटांड़ पुलिस ने मिलकर अंजाम दिया.
भोली-भाली जनता को ऐसे बनाते थे अपना शिकार
इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान प्रीतम दास (25 वर्ष), विनोद दास (23 वर्ष) और मो. तुफान उर्फ तुफान अंसारी (28 वर्ष) के रूप में हुई है. इनमें से प्रीतम और विनोद सगे भाई हैं. पुलिस ने इनके पास से ठगी में इस्तेमाल होने वाले 10 मोबाइल और 10 सिम कार्ड भी जब्त किए हैं. पूछताछ में इनके काम करने के तरीके का भी खुलासा हुआ है. ये शातिर अपराधी एचडीएफसी (HDFC) और एसबीआई (SBI) जैसे बड़े बैंकों के ग्राहकों को अपना निशाना बनाते थे. खुद को बैंक अधिकारी बताकर ये लोगों को डराते थे कि उनका कार्ड ब्लॉक हो गया है या फिर केवाईसी (KYC) अपडेट कराना जरूरी है. जैसे ही कोई ग्राहक इनके झांसे में आकर अपनी गोपनीय बैंकिंग डिटेल शेयर करता, ये ई-वॉलेट के जरिए चंद मिनटों में उसका खाता साफ कर देते थे.
अंतरराज्यीय स्तर पर फैले तार, कड़े कानूनों के तहत मुकदमा दर्ज
जांच में यह बात भी सामने आई है कि इन अपराधियों का जाल सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों के लोग भी इनके झांसे में आ चुके थे. फिलहाल पुलिस इनके पास से मिले डिजिटल सबूतों और फोन कॉल्स को खंगाल रही है, ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य चेहरों को भी सामने लाया जा सके. इस मामले को लेकर साइबर थाने में कांड संख्या 31/26 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. पकड़े गए आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), आईटी एक्ट और टेलीकम्युनिकेशन एक्ट की कई गंभीर और कड़ी धाराओं के तहत कानूनी शिकंजा कसा गया है. डीएसपी अमित रविदास के अनुसार, इन अपराधियों से पूछताछ के आधार पर आगे की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में साइबर अपराध के कुछ और बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ होने की पूरी उम्मीद है.