यात्रियों का कहना है कि रांची–बेंगलुरु रूट पर मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन रेलवे की ओर से न तो नई ट्रेनें शुरू की गई हैं और न ही मौजूदा ट्रेनों के फेरे बढ़ाए गए हैं। नतीजा यह है कि लोगों को लंबी वेटिंग लिस्ट, सीटों की कमी और ठसा-ठस भरे डिब्बों में सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कई बार आरक्षित कोचों में भी इतनी भीड़ हो जाती है कि यात्रियों के लिए बैठना तक मुश्किल हो जाता है।
सोशल मीडिया पर सामने आए संदेशों में यात्रियों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि झारखंड और बेंगलुरु के बीच यात्रा करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुविधाएं उसी अनुपात में नहीं बढ़ाई गईं। उनका आरोप है कि वर्षों से इस मार्ग पर अतिरिक्त ट्रेनों की मांग की जा रही है, फिर भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
“झारखंड रेल यूजर्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए सांसद संजय सेठ और रेल मंत्रालय का ध्यान आकर्षित किया है।“
साथ ही लोगों का कहना है कि यह केवल ट्रेनों की संख्या का मामला नहीं, बल्कि उन हजारों छात्रों, कामगारों, नौकरीपेशा लोगों और परिवारों की परेशानी का सवाल है, जो बेहतर जीवन की उम्मीद लेकर इस मार्ग पर सफर करते हैं। यात्रियों ने मांग की है कि रांची–बेंगलुरु रूट पर नई ट्रेनें चलाई जाएं, मौजूदा ट्रेनों के फेरे बढ़ाए जाएं और अतिरिक्त कोच जोड़े जाएं, ताकि यात्रियों को भीड़ और असुविधा से राहत मिल सके। लोगों का ये भी कहना है कि जब तक क्षमता नहीं बढ़ाई जाती, तब तक यह संघर्ष यूं ही जारी रहेगा और हर यात्रा उनके लिए एक नई परीक्षा बनी रहेगी।