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  • 2026-06-05

EDITORIAL : रांची–बेंगलुरु रेल मार्ग पर यात्रियों की पीड़ा फिर आई सामने, भीड़भाड़ से परेशान लोगों ने उठाई अतिरिक्त ट्रेनों की मांग

EDITORIAL (Anshuman) रांची से बेंगलुरु तक का सफर आज हजारों झारखंडवासियों की जरूरत बन चुका है। कोई रोजगार की तलाश में जाता है, कोई पढ़ाई के लिए, तो कोई अपने परिवार के बेहतर भविष्य के सपने लेकर इस लंबे सफर पर निकलता है। लेकिन इन सपनों की राह में सबसे बड़ी चुनौती बन रही है ट्रेनों में लगातार बढ़ती भीड़। ट्रेन संख्या 12835 हटिया–एसएमवीटी बेंगलुरु एक्सप्रेस में हर यात्रा के दौरान यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है, जिससे सफर बेहद कठिन हो गया है।


यात्रियों का कहना है कि रांची–बेंगलुरु रूट पर मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन रेलवे की ओर से न तो नई ट्रेनें शुरू की गई हैं और न ही मौजूदा ट्रेनों के फेरे बढ़ाए गए हैं। नतीजा यह है कि लोगों को लंबी वेटिंग लिस्ट, सीटों की कमी और ठसा-ठस भरे डिब्बों में सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कई बार आरक्षित कोचों में भी इतनी भीड़ हो जाती है कि यात्रियों के लिए बैठना तक मुश्किल हो जाता है।

सोशल मीडिया पर सामने आए संदेशों में यात्रियों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि झारखंड और बेंगलुरु के बीच यात्रा करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुविधाएं उसी अनुपात में नहीं बढ़ाई गईं। उनका आरोप है कि वर्षों से इस मार्ग पर अतिरिक्त ट्रेनों की मांग की जा रही है, फिर भी समस्या जस की तस बनी हुई है।

“झारखंड रेल यूजर्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए सांसद संजय सेठ और रेल मंत्रालय का ध्यान आकर्षित किया है।“

साथ ही लोगों का कहना है कि यह केवल ट्रेनों की संख्या का मामला नहीं, बल्कि उन हजारों छात्रों, कामगारों, नौकरीपेशा लोगों और परिवारों की परेशानी का सवाल है, जो बेहतर जीवन की उम्मीद लेकर इस मार्ग पर सफर करते हैं। यात्रियों ने मांग की है कि रांची–बेंगलुरु रूट पर नई ट्रेनें चलाई जाएं, मौजूदा ट्रेनों के फेरे बढ़ाए जाएं और अतिरिक्त कोच जोड़े जाएं, ताकि यात्रियों को भीड़ और असुविधा से राहत मिल सके। लोगों का ये भी कहना है कि जब तक क्षमता नहीं बढ़ाई जाती, तब तक यह संघर्ष यूं ही जारी रहेगा और हर यात्रा उनके लिए एक नई परीक्षा बनी रहेगी।

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