Giridih News: गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड क्षेत्र में गरीबों के राशन की कथित कालाबाजारी का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है. भाटडीह स्थित सरकारी चावल गोदाम से रात के अंधेरे में लगभग 800 बोरा चावल लेकर जा रहे एक वाहन को ग्रामीणों ने रोक लिया. ग्रामीणों के हस्तक्षेप के बाद सरकारी अनाज को बाजार में खपाने की कोशिश नाकाम हो गई.
ग्रामीणों ने घेरकर रोका चावल लदा वाहन
जानकारी के अनुसार, भाटडीह गोदाम से चावल लदा ट्रक निकला था. इसकी भनक लगने के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने वाहन को बीच रास्ते में रोक लिया और मामले की जानकारी जनप्रतिनिधियों को दी. ग्रामीणों का आरोप है कि यह चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीब परिवारों के लिए आवंटित था, जिसे अवैध तरीके से बाहर भेजने की कोशिश की जा रही थी.
पुलिस ने वाहन कब्जे में लेकर शुरू की जांच
सूचना मिलने के बाद जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई. इसके बाद जमुआ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और चावल लदे वाहन को जब्त कर लिया. पुलिस वाहन से जुड़े दस्तावेजों और चावल के परिवहन से संबंधित कागजातों की जांच कर रही है.
सफेदपोशों की भूमिका का लगाया आरोप
मामले को लेकर जमुआ प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि संजीत यादव ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है. उन्होंने कहा कि जांच सही तरीके से हुई तो कई लोगों के नाम सामने आ सकते हैं.
वहीं ग्रामीण बैजू यादव ने कहा कि गरीबों के हक के अनाज को गलत तरीके से बेचने की कोशिश की जा रही थी. अगर समय रहते ग्रामीणों को जानकारी नहीं मिलती तो सैकड़ों बोरा चावल बाजार तक पहुंच सकता था.
जांच के बाद साफ होगी सच्चाई
सीएमआर एजेंट मदन मोहन ने भी मामले में अपना पक्ष रखा है. फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि चावल का परिवहन नियमों के तहत हो रहा था या फिर सरकारी अनाज की कालाबाजारी की जा रही थी.
मामले के सामने आने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर गरीबों के हिस्से का अनाज किसकी निगरानी में बाहर भेजा जा रहा था. प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले से पर्दा उठ सकेगा.