पार्टी कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि जब तक लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को पहले जैसी सुरक्षा नहीं मिलती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा. इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है.
सुरक्षा में बदलाव के फैसले पर विपक्ष ने उठाए सवाल
राज्य सरकार के हालिया फैसले के तहत लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की जेड प्लस सुरक्षा समाप्त कर दी गई है. इसके बाद से आरजेडी लगातार सरकार को घेर रही है. पार्टी नेताओं का आरोप है कि विपक्ष के प्रमुख चेहरों को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है.
आरजेडी का दावा है कि केवल लालू और राबड़ी ही नहीं, बल्कि नेता प्रतिपक्ष रहे तेजस्वी यादव की सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है. वहीं पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल के नेता तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में भी हाल के दिनों में कटौती हुई है. विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई के तौर पर देख रहा है.
राबड़ी आवास के बाहर जुटे कार्यकर्ता, सरकार के खिलाफ लगाए नारे
सुरक्षा में कटौती के विरोध में सबसे पहले आरजेडी प्रवक्ता और पूर्व विधायक शक्ति सिंह यादव राबड़ी देवी के आवास पहुंचे. उन्होंने धरना शुरू किया, जिसके बाद धीरे धीरे बड़ी संख्या में कार्यकर्ता वहां जमा हो गए.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार दशकों से बिहार की राजनीति का अहम हिस्सा रहा है. ऐसे में उनकी सुरक्षा को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाना चाहिए. कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की और फैसले को वापस लेने की मांग दोहराई.
आरजेडी ने कहा नेताओं को कमजोर करने की कोशिश
आरजेडी प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सुरक्षा में कटौती का फैसला केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक है. उनके मुताबिक विपक्षी नेताओं को अपमानित करने और उनकी राजनीतिक गतिविधियों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है.
उन्होंने कहा कि जनता की आवाज उठाने वाले नेताओं पर इस तरह का दबाव लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. पार्टी का आरोप है कि सरकार जानबूझकर विपक्ष को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रही है.
बीजेपी ने कहा नियमों के तहत लिए गए हैं सभी फैसले
वहीं भारतीय जनता पार्टी ने आरजेडी के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े फैसले किसी राजनीतिक आधार पर नहीं बल्कि निर्धारित नियमों और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर लिए जाते हैं.
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि आरजेडी इस मुद्दे पर अनावश्यक दबाव बनाने की राजनीति कर रही है. उन्होंने कहा कि सुरक्षा से जुड़े सभी निर्णय तय प्रक्रिया के अनुसार लिए जाते हैं.
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी यही बात दोहराते हुए कहा कि राज्य में सुरक्षा मामलों की समीक्षा के लिए एक समिति काम करती है और उसकी अनुशंसा के आधार पर ही फैसला लिया जाता है. उनके अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को पात्रता के अनुरूप सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है.
सुरक्षा विवाद के बीच फिर चर्चा में आया सरकारी बंगला
सुरक्षा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सरकारी आवास के मुद्दे तक पहुंच गया है. राबड़ी देवी को पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने का नोटिस पहले ही दिया जा चुका है.
राज्य सरकार का कहना है कि नियमों के तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों को तय समय के बाद सरकारी आवास खाली करना होता है. इसके लिए राबड़ी देवी को 39 हार्डिंग रोड स्थित आवास आवंटित किया गया है.
हालांकि राबड़ी देवी ने अब तक वहां शिफ्ट होने पर सहमति नहीं जताई है. बताया जाता है कि मौजूदा आवास पिछले दो दशकों से अधिक समय से उनके उपयोग में है. ऐसे में यह मामला भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है.
रोहिणी आचार्य ने भी फैसले पर जताई नाराजगी
लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में बदलाव को लेकर आरजेडी नेता रोहिणी आचार्य ने भी सरकार को निशाने पर लिया है. उन्होंने इस फैसले को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताते हुए सवाल खड़े किए हैं.
रोहिणी आचार्य का कहना है कि विपक्षी नेताओं के साथ अलग व्यवहार किया जा रहा है और सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए.