Inspirational Story: जमशेदपुर से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो हमें यह याद दिलाती है कि हौसले और जज्बे से कुछ भी असंभव नहीं है। बंगाल के झाड़ग्राम, गोपीबल्लभपुर के रहने वाले जगन्नाथ बेरा दो हाथों से दिव्यांग होने के बावजूद अपनी कला के दम पर न सिर्फ रोजगार कमा रहे हैं, बल्कि लोगों के लिए मिसाल भी कायम कर रहे हैं।
जगन्नाथ बेरा ढोलक और झाल बजाने की कला में माहिर हैं। वे अपनी इस कला

के जरिए न सिर्फ अपनी आजीविका चला रहे हैं, बल्कि लोगों का दिल भी जीत रहे हैं। उनकी यह कला देखकर हर कोई दंग रह जाता है।
इन दिनों कोल्हान के प्रसिद्ध पोटका हरिना मेला में जगन्नाथ बेरा पहुंचकर ढोलक और झाल बजा रहे हैं। उनकी प्रस्तुति से लोग मंत्रमुग्ध हो रहे हैं और उनकी कला की सराहना कर रहे हैं।
जगन्नाथ बेरा बताते हैं कि वे पिछले 10 सालों से इस कला के जरिए काम कर रहे हैं। मूल रूप से बंगाल के रहने वाले जगन्नाथ झारखंड के हर जिले में जाकर ढोलक और झाल बजाते हैं। उनकी मेहनत और जज्बा हर किसी के लिए प्रेरणा है।
जगन्नाथ बेरा की कहानी हमें यह याद दिलाती है कि जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है। अगर हमारे पास हौसला और जज्बा हो तो हम किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। जगन्नाथ बेरा की कहानी हमें प्रेरित करती है कि हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए और अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ते रहना चाहिए।
जगन्नाथ बेरा की कहानी एक प्रेरणादायक उदाहरण है जो हमें यह याद दिलाती है कि हौसले और जज्बे से कुछ भी असंभव नहीं है। उनकी कला और मेहनत ने उन्हें एक सफल कलाकार बनाया है और लोगों के लिए मिसाल कायम की है।