Jamshedpur: टाटा स्टील प्रबंधन ने अपने कार्यरत कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों को समय पर आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने का निर्देश दिया है। कंपनी की ओर से जारी अलग-अलग सूचना में कहा गया है कि जिनकी वार्षिक आय निर्धारित कर-मुक्त सीमा से अधिक है, उन्हें 31 जुलाई 2026 तक अपना आयकर रिटर्न जमा करना अनिवार्य होगा। कंपनी के चीफ रेवेन्यू अवनीश अरुण की ओर से जारी सूचना के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए फॉर्म-16 कर्मचारियों को 15 जून से डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। कर्मचारी इसे एसएपी फियोरी पोर्टल से डाउनलोड कर सकेंगे। यदि डाउनलोड करने में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या आती है, तो कर्मचारी आईटी हेल्पडेस्क से संपर्क कर सकते हैं।
कम शुल्क में मिलेगी आईटीआर फाइलिंग सहायता
रिटर्न भरने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कंपनी ने चार अधिकृत सेवा प्रदाताओं को नामित किया है। कर्मचारी 350 रुपये (कर अतिरिक्त) के भुगतान पर उनकी सहायता लेकर आईटीआर-1 फाइल कर सकेंगे। यह सुविधा 20 जून से 25 जुलाई तक उपलब्ध रहेगी। हालांकि कर्मचारी चाहें तो किसी अन्य माध्यम से भी अपना रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। जिन कर्मचारियों को आईटीआर-2 या आईटीआर-3 भरना है, उन्हें अपनी संपत्ति, देनदारियों तथा अन्य वित्तीय विवरण भी उपलब्ध कराने होंगे। इसके अलावा जिनकी विदेश में कोई आय या संपत्ति है, उन्हें उसका विवरण भी आयकर रिटर्न में अनिवार्य रूप से शामिल करना होगा।
देर से रिटर्न भरने पर लगेगा जुर्माना
आयकर अधिनियम की धारा 234एफ के तहत निर्धारित समय सीमा तक रिटर्न दाखिल नहीं करने वाले करदाताओं को जुर्माना देना पड़ सकता है। 31 जुलाई के बाद रिटर्न भरने पर 31 दिसंबर तक 5,000 रुपये तक की लेट फीस देनी होगी। हालांकि जिनकी कुल आय 5 लाख रुपये से कम है, उनके लिए यह जुर्माना अधिकतम 1,000 रुपये निर्धारित है। टाटा स्टील से सेवानिवृत्त कर्मचारियों, पेंशनभोगियों तथा विभिन्न योजनाओं के तहत कंपनी से अलग हो चुके कर्मियों के लिए भी फॉर्म-16 ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा। यह दस्तावेज एलुमनाई पोर्टल के ‘माय डॉक्यूमेंट’ सेक्शन में देखा और डाउनलोड किया जा सकेगा।
रजिस्ट्रेशन और लॉगिन में मदद के लिए हेल्पलाइन
एलुमनाई पोर्टल पर लॉगिन या रजिस्ट्रेशन से जुड़ी परेशानी होने पर संबंधित कर्मचारी पीपल केयर टीम से संपर्क कर सकते हैं। कंपनी ने कहा है कि समय पर आयकर रिटर्न दाखिल कर कर्मचारी और पेंशनभोगी अनावश्यक जुर्माने और कानूनी जटिलताओं से बच सकते हैं।