Jharkhand Court News: झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि मामूली आरोप के आधार पर किसी कर्मचारी की लंबे समय की सेवा खत्म करना उचित नहीं माना जा सकता. अदालत ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई न्याय और निष्पक्षता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि अस्पष्ट कारण बताओ नोटिस के आधार पर किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं हटाया जा सकता.
राज्य सरकार को कर्मचारी की बहाली का आदेश
खंडपीठ ने बोकारो डीआरडीए में करीब 17 वर्षों तक संविदा चपरासी के रूप में कार्य कर चुके रणजीत कुमार हिमांशु की अपील स्वीकार करते हुए उनकी बर्खास्तगी रद्द कर दी. अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि उन्हें 1 जुलाई 2026 तक दोबारा सेवा में लिया जाए और बकाया वेतन का 50 प्रतिशत भुगतान भी किया जाए.
मामूली आरोप पर सख्त कार्रवाई को बताया असंतुलित
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य आया कि कर्मचारी पर कार्यालय से चाय पत्ती और बिस्किट ले जाने का आरोप था. अदालत ने माना कि कारण बताओ नोटिस में आरोपों का स्पष्ट उल्लेख ही नहीं किया गया था. हाईकोर्ट ने कहा कि इतने छोटे आरोप के आधार पर 17 वर्षों की सेवा समाप्त करना अनुपातिकता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है.
अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी जताई नाराजगी
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित अधिकारियों ने कर्मचारी का पक्ष, उसकी पारिवारिक स्थिति और लंबे समय तक दिए गए सेवा योगदान पर पर्याप्त विचार नहीं किया. हाईकोर्ट ने बोकारो के उपायुक्त और उप विकास आयुक्त को आदेश का समय पर पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी है और निर्धारित अवधि के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया है.