Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-06-26

BREAKING: पारडीह-बालीगुमा एलिवेटेड कॉरिडोर पर फिर अटका काम, 4.644 हेक्टेयर भूमि के डायवर्जन पर राज्य सरकार ने NOC देने से किया इनकार

BREAKING: टाटा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रस्तावित पारडीह कालीमंदिर से बालीगुमा तक 4/6 लेन एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। उपयोगिता (यूटिलिटी) शिफ्टिंग के लिए आवश्यक 4.644 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन पर झारखंड सरकार ने फिलहाल अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) देने से इनकार कर दिया है। राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव पर आगे निर्णय लेने से पहले मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (Chief Wildlife Warden - CWLW) से विस्तृत टिप्पणी मांगी है।


वन स्वीकृति की प्रक्रिया में फिर बढ़ी अड़चन

सूत्रों के अनुसार, यूटिलिटी शिफ्टिंग के लिए वन भूमि के उपयोग का प्रस्ताव राज्य स्तर पर लंबित है। सरकार का कहना है कि अंतिम निर्णय से पहले मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की राय आवश्यक है। इससे परियोजना की मंजूरी प्रक्रिया में एक बार फिर देरी की संभावना बढ़ गई है।



जाम से राहत के लिए बनाई जा रही है महत्वाकांक्षी परियोजना
करीब 10.02 किलोमीटर लंबा यह एलिवेटेड कॉरिडोर पारडीह कालीमंदिर, डिमना चौक होते हुए बालीगुमा तक बनाया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य जमशेदपुर के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल इस हिस्से पर लगातार लगने वाले ट्रैफिक जाम से राहत दिलाना और रांची-जमशेदपुर के बीच आवागमन को सुगम बनाना है। यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से EPC मोड में कराई जा रही है और इसका निर्माण कार्य एच.जी. इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड को सौंपा गया है।

निर्माण कार्य पहले से ही कई कारणों से प्रभावित
एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण कार्य पहले से ही विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी बाधाओं का सामना कर रहा है। वन भूमि हस्तांतरण, बिजली लाइनों की शिफ्टिंग, जलापूर्ति पाइपलाइन हटाने तथा अन्य विभागीय मंजूरियों में देरी के कारण परियोजना की गति प्रभावित हुई है। हाल के महीनों में निर्माण स्थल पर धूल प्रदूषण को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध भी सामने आया था।

CWLW की टिप्पणी के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
अब सभी की नजर मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की रिपोर्ट पर टिकी है। उनकी टिप्पणी मिलने के बाद ही राज्य सरकार यूटिलिटी शिफ्टिंग के लिए वन भूमि के डायवर्जन और NOC पर अंतिम निर्णय लेगी। यदि मंजूरी में और देरी होती है तो परियोजना की समयसीमा भी आगे खिसक सकती है।

WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !