Chaibasa: चाईबासा और चक्रधरपुर के शहरी इलाकों में लाभुकों को कीड़े लगी और एक्सपायरी डेट पार कर चुकी चना दाल दी जा रही है। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में विभाग और प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ गई है। यह मामला चाईबासा के मिशनहाता मोहल्ले और चक्रधरपुर के तंबाकू पट्टी रोड स्थित राशन दुकानों से सामने आया है। जानकारी के अनुसार, केवल यही नहीं बल्कि जिले के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की खराब दाल के वितरण की आशंका जताई जा रही है। जब लाभुकों ने घर जाकर राशन के पैकेट खोले तो उसमें घुन लगे पाए गए और पैकेट पर दर्ज एक्सपायरी तिथि भी काफी पहले समाप्त हो चुकी थी। कई परिवारों को मजबूरी में यह राशन फेंकना पड़ा।
गरीबों की थाली तक पहुंचा खराब राशन
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जिला मुख्यालय जैसे क्षेत्रों में इस तरह की स्थिति है तो ग्रामीण इलाकों में वितरण व्यवस्था की स्थिति और भी चिंताजनक हो सकती है। गरीबों के लिए चलाई जाने वाली योजनाओं में इस तरह की गड़बड़ी सीधे तौर पर उनके हक पर असर डाल रही है और लोगों का भरोसा भी टूट रहा है। मामला सामने आने के बाद पीडीएस दुकानदारों में भी हलचल मच गई है। डीलरों का कहना है कि उन्हें जो भी सामग्री मिलती है, वह सरकारी गोदाम से ही आती है और उसी के आधार पर वितरण करना उनकी मजबूरी है। उनका दावा है कि खराब और पुराना स्टॉक पहले से ही सप्लाई चैन में मौजूद है, जिसकी वजह से यह स्थिति बनी है।
जिला आपूर्ति पदाधिकारी ने दी जांच का आश्वासन
इस पूरे मामले पर जिला आपूर्ति पदाधिकारी (DSO) सुनीला खलखो ने बताया कि वह वर्तमान में अवकाश पर हैं, लेकिन लौटने के बाद पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और आपूर्तिकर्ताओं पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लाभुकों ने प्रशासन से मांग की है कि राशन वितरण से पहले सभी खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच अनिवार्य रूप से की जाए। उनका कहना है कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य गरीबों को राहत देना है, लेकिन लापरवाही के कारण उनके हिस्से में खराब और अनुपयोगी अनाज पहुंच रहा है, जो पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
प्रशासन ने शुरू की जांच की तैयारी
घटना सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। सूत्रों के अनुसार, संबंधित सरकारी गोदामों में मौजूद चना दाल के स्टॉक की जांच की तैयारी की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि खराब सामग्री की आपूर्ति कहां से और कैसे हुई, और आगे इस तरह की घटनाओं पर तुरंत रोक लगाई जा सके।