US India Trade: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील से पहले अमेरिकी प्रशासन ने चार भारतीय कंपनियों पर लगी आर्थिक पाबंदियां हटा दी हैं. ये कंपनियां अब अमेरिकी वित्त विभाग की स्पेशली डिजिग्नेटेड नेशनल्स (SDN) सूची से बाहर हो गई हैं. भारत सरकार ने इस फैसले को लेकर कहा है कि प्रतिबंध लगाए जाने के बाद दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर लगातार बातचीत हुई थी और भारत ने एक जिम्मेदार वैश्विक साझेदार के तौर पर अपना पक्ष रखा था.
चार भारतीय कंपनियों को मिली बड़ी राहत
अमेरिकी वित्त विभाग के फैसले के बाद हैदराबाद की आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और लोकेश मशीन्स लिमिटेड, अहमदाबाद की गैलेक्सी बेयरिंग्स लिमिटेड तथा दिल्ली स्थित शौर्य एरोनॉटिक्स लिमिटेड पर लगी पाबंदियां समाप्त कर दी गई हैं. SDN सूची में शामिल होने पर किसी कंपनी की अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में मौजूद संपत्तियां फ्रीज हो जाती हैं और उसके साथ वित्तीय लेनदेन पर भी प्रतिबंध लागू हो जाता है.
दो साल पहले रूस से जुड़े आरोपों के बाद हुई थी कार्रवाई
इन कंपनियों को करीब दो वर्ष पहले अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय ने प्रतिबंधित सूची में शामिल किया था. वर्ष 2024 में भारत की 19 कंपनियों और दो व्यक्तियों पर कार्रवाई की गई थी. अमेरिका का दावा था कि ये संस्थाएं उन गतिविधियों से जुड़ी थीं, जिनसे रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती थी. यह कदम रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद मॉस्को पर लगाए गए प्रतिबंधों के अनुपालन को सुनिश्चित करने की व्यापक नीति का हिस्सा माना गया था.
भारत ने बातचीत जारी रखी, ट्रेड डील पर बढ़ी उम्मीद
विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रतिबंध लागू होने के बाद भारत ने वाशिंगटन के साथ इस मुद्दे पर लगातार संवाद बनाए रखा. मंत्रालय ने दोहराया कि भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय का जिम्मेदार सदस्य है और वैश्विक नियमों के अनुरूप अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करता है. जिन चार कंपनियों से प्रतिबंध हटाया गया है, उनमें लोकेश मशीन्स लिमिटेड और गैलेक्सी बेयरिंग्स लिमिटेड शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियां हैं. लोकेश मशीन्स के ग्राहकों में जॉन डीरे, कमिंस, वोल्वो, होंडा और सुजुकी जैसी वैश्विक कंपनियां शामिल हैं, जबकि आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज विमानन क्षेत्र में काम करती है. माना जा रहा है कि यह फैसला भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को सकारात्मक दिशा देने वाला कदम हो सकता है. हालांकि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील पर अंतिम आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है.