Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-07-01

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट का अहम फैसला, दिव्यांग आयुक्त नहीं कर सकते निजी भूमि विवाद का निपटारा

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि राज्य दिव्यांग आयुक्त (State Disability Commissioner) को निजी पक्षों के बीच भूमि के स्वामित्व (टाइटल) या कब्जे से जुड़े विवादों का फैसला करने का अधिकार नहीं है. अदालत ने कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत आयुक्त को जांच के दौरान सिविल कोर्ट जैसी कुछ प्रक्रियात्मक शक्तियां जरूर मिली हैं, लेकिन इनका उपयोग निजी व्यक्तियों के बीच अचल संपत्ति के स्वामित्व संबंधी विवादों के निपटारे के लिए नहीं किया जा सकता.

भूमि विवाद का फैसला केवल सिविल कोर्ट करेगा
हाईकोर्ट ने कहा कि भूमि के टाइटल और कब्जे से जुड़े मामलों की सुनवाई और निर्णय केवल सक्षम सिविल न्यायालय ही कर सकता है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के दिव्यांग होने मात्र से उसके सभी निजी विवाद स्वतः राज्य दिव्यांग आयुक्त के अधिकार क्षेत्र में नहीं आ जाते.

चतरा की जमीन विवाद से जुड़ा था मामला
यह फैसला चतरा जिले की भूमि विवाद से संबंधित दो रिट याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सुनाया गया. मामले में एक दिव्यांग व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि उसकी जमीन पर अवैध कब्जे का प्रयास किया जा रहा है. शिकायत के आधार पर राज्य दिव्यांग आयुक्त ने भूमि के स्वामित्व पर टिप्पणी करते हुए राजस्व अधिकारियों को कार्रवाई करने का निर्देश दिया था.

हाईकोर्ट ने आयुक्त का आदेश किया रद्द
हाईकोर्ट ने राज्य दिव्यांग आयुक्त के आदेश को उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए निरस्त कर दिया. अदालत ने कहा कि भूमि के टाइटल या कब्जे से जुड़े विवादों का समाधान न तो राजस्व अधिकारियों के समक्ष और न ही दिव्यांग आयुक्त के समक्ष किया जा सकता है. ऐसे मामलों के लिए संबंधित पक्षों को सक्षम सिविल न्यायालय का ही रुख करना होगा.



दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के दायरे को किया स्पष्ट
अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय दिलाना है, न कि निजी संपत्ति से जुड़े सिविल विवादों का न्यायिक निपटारा करना. इसलिए इस कानून के तहत मिली शक्तियों का उपयोग केवल अधिनियम के दायरे तक ही सीमित रहेगा.
WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !