Jharkhand High Court Pension Order: झारखंड हाईकोर्ट ने पेंशन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कहा है कि लंबे समय तक तदर्थ या एडहॉक आधार पर सेवा देने वाले कर्मचारियों को केवल अस्थायी नियुक्ति का आधार बनाकर पेंशन लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता. अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी की लंबी और निरंतर सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने परमेश्वर शाह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. याचिकाकर्ता ने लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद पेंशन का लाभ नहीं मिलने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
15 वर्ष से अधिक सेवा का दिया गया हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सौरभ शेखर ने अदालत को बताया कि पेंशन नियमों में 15 वर्ष से अधिक समय तक सेवा देने वाले अस्थायी कर्मचारियों को पेंशन का लाभ दिए जाने का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि लंबे समय तक काम करने के बाद कर्मचारी को पेंशन से वंचित रखना उचित नहीं है.
वहीं, राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि स्थायी प्रतिष्ठान में कार्यरत नहीं रहने वाले कर्मचारी पेंशन के पात्र नहीं माने जा सकते.
पुराने फैसलों के आधार पर सुनाया निर्णय
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पूर्व में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णयों का उल्लेख किया. अदालत ने माना कि सेवा की प्रकृति और अवधि को देखते हुए केवल अस्थायी या तदर्थ नियुक्ति के आधार पर पेंशन से इनकार नहीं किया जा सकता.
इस फैसले को लंबे समय तक तदर्थ, अस्थायी या दैनिक वेतनभोगी व्यवस्था में काम कर चुके कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.