Jamshedpur: जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत दलमा की तराई में स्थित डिमना डैम से सटे गेडुआ पंचायत में आदिवासी भूमि पर कथित अवैध कब्जे के विरोध में ग्रामीणों ने बड़ी ग्रामसभा आयोजित की। तेज बारिश के बावजूद पंचायत के सैकड़ों महिला-पुरुष और ग्रामीण ग्रामसभा में शामिल हुए तथा आदिवासी जमीन की सुरक्षा की मांग उठाई। ग्रामसभा में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चांडिल निवासी एक गैर-आदिवासी व्यक्ति ने पहले पंचायत क्षेत्र में एक आदिवासी परिवार से सीमित भूमि खरीदी थी। इसके बाद कथित रूप से उसने आसपास की कई एकड़ आदिवासी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया।
सर्वसम्मति से पारित किया गया प्रस्ताव
ग्रामीणों का आरोप है कि जब वास्तविक भूमि मालिकों ने इसका विरोध किया तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। इस घटना के बाद पूरे पंचायत क्षेत्र में आक्रोश और तनाव का माहौल बना हुआ है। ग्रामसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की गई। ग्रामीणों ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त, जुगसलाई प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और अंचल अधिकारी से अविलंब जांच कर कथित अवैध कब्जा हटाने तथा आदिवासी भूमि मूल रैयतों को वापस दिलाने की मांग की।
15 दिनों में कार्रवाई नहीं हुई तो हुल आंदोलन
ग्रामीणों ने बताया कि ग्रामसभा में संबंधित पक्ष को भी अपना पक्ष रखने के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन उनका कोई प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हुआ। ग्रामसभा में ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे पारंपरिक तीर-धनुष के साथ "हुल आंदोलन" शुरू करेंगे। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहा है और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
पांचवीं अनुसूची और सीएनटी-एसपीटी एक्ट के पालन की मांग
सभा को संबोधित करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें प्रशासन से उम्मीद है कि संविधान की पांचवीं अनुसूची तथा सीएनटी-एसपीटी एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप आदिवासी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई होगी। ग्रामसभा के बाद ग्रामीणों ने बताया कि एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप और शीघ्र कार्रवाई की मांग करेगा।