LPG Imports: भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए एलपीजी (LPG) आयात रणनीति में एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है। देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियां अमेरिका से तरलीकृत पेट्रोलियम गैस की खरीद को मौजूदा स्तर से लगभग दोगुना करने की योजना पर गंभीरता से काम कर रही हैं। वर्तमान में भारत अमेरिका से सालाना करीब 22 लाख टन एलपीजी आयात करता है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य केवल आयात स्रोतों में विविधता लाना ही नहीं है, बल्कि खाड़ी देशों (मिडल ईस्ट) पर अपनी अत्यधिक निर्भरता को कम करना है ताकि भविष्य में किसी भी वैश्विक उथल-पुथल का असर भारतीय रसोई तक न पहुंचे।
संकट के समय मददगार बना अमेरिकी समझौता
भारत ने नवंबर 2025 में अमेरिका के साथ एक साल का एक संरचित (structured) एलपीजी आपूर्ति समझौता किया था, जिसके तहत वर्ष 2026 में देश की कुल घरेलू एलपीजी जरूरत का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका से आना तय हुआ था। यह रणनीतिक फैसला बेहद सही साबित हुआ, क्योंकि हाल ही में पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के कारण खाड़ी देशों से आने वाली कई खेप प्रभावित हुईं। ऐसे नाजुक समय में अमेरिका से होने वाली नियमित और सुरक्षित एलपीजी आपूर्ति ने भारतीय बाजारों को स्थिर बनाए रखा और घरेलू स्तर पर गैस की किल्लत नहीं होने दी।
भविष्य के लिए 30 दिनों का रणनीतिक भंडार
घरेलू और वाणिज्यिक (commercial) सिलेंडरों की दैनिक मांग को पूरा करने के लिए तेल कंपनियों के पास पहले से ही 45 दिनों का ऑपरेशनल स्टॉक मौजूद रहता है। लेकिन केंद्र सरकार अब इससे अलग 30 दिनों का एक विशेष "रणनीतिक भंडार" (strategic reserve) विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। मई 2026 में पेट्रोलियम मंत्रालय ने सभी तेल कंपनियों को इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए थे। यह अतिरिक्त भंडारण क्षमता किसी भी बड़े वैश्विक संकट या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में देश के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करेगी।
सीमित वैश्विक निर्यातक और भारत की खोज
पश्चिम एशिया के हालिया तनाव के दौरान कच्चे तेल की उपलब्धता तो काफी हद तक सामान्य रही, लेकिन एलपीजी की आपूर्ति ने सरकार की चिंताएं बढ़ा दी थीं। दुनिया में बड़े पैमाने पर एलपीजी निर्यात करने वाले देशों की संख्या बेहद सीमित है। इसी को देखते हुए भारत ने वैकल्पिक रास्तों पर अपनी रफ्तार तेज कर दी है। चूंकि अमेरिका के पास बड़े पैमाने पर अतिरिक्त एलपीजी निर्यात क्षमता मौजूद है, इसलिए भारत वहां से दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है। इसके अलावा, अल्जीरिया जैसे देशों से भी नए विकल्पों को लगातार टटोला जा रहा है।
वैश्विक विविधता और भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्ते
ऊर्जा सुरक्षा को पूरी तरह अभेद्य बनाने के लिए भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता। यही वजह है कि सरकार और तेल कंपनियां अर्जेंटीना, नाइजीरिया, मलेशिया और अल्जीरिया जैसे अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों से भी एलपीजी आयात बढ़ाने की संभावनाओं पर काम कर रही हैं। अमेरिका से बढ़ते ऊर्जा आयात का एक बड़ा फायदा दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर भी दिख रहा है, जिससे आपसी व्यापार संतुलन बेहतर हो रहा है। स्रोतों की यह विविधता भविष्य की हर चुनौती से निपटने में भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी।