DRDA Employees Jharkhand: जिला ग्रामीण विकास अभिकरण में काम कर रहे गैर सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है. राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि DRDA के पंचायती राज व्यवस्था में विलय के बाद भी उनकी सेवाएं खत्म नहीं होंगी. इन कर्मचारियों को जिला परिषद के अधीन समायोजित किया जाएगा.
ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है. कैबिनेट से मंजूरी मिलने के करीब दो साल बाद विभाग ने DRDA के विलय और कर्मचारियों के समायोजन की प्रक्रिया को औपचारिक रूप दिया है.
नई व्यवस्था में DRDA कर्मियों को जिला परिषद के भीतर गठित होने वाली विकास शाखा में तैनात किया जाएगा. कर्मचारियों की मौजूदा सेवा शर्तों में बदलाव नहीं होगा. संविदा पर काम कर रहे कर्मियों के लिए भी पहले से लागू शर्तें ही जारी रहेंगी.
हालांकि, जिला परिषद में समायोजन के बाद DRDA कर्मियों को जूनियर माना जाएगा. विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि DRDA में कार्यकाल के दौरान किसी कर्मचारी पर लगे आरोपों से जुड़ी विभागीय कार्रवाई नियमों के तहत आगे भी चलती रहेगी.
DRDA के लिए पहले से सृजित पद ग्रामीण विकास विभाग के अधीन बने रहेंगे, लेकिन इन रिक्त पदों पर नई नियुक्तियां नहीं होंगी. जिला परिषद की विकास शाखा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, JOHAR, NREP, जल छाजन, विधायक योजना और ग्रामीण विकास विभाग की अन्य योजनाओं की निगरानी करेगी. यह शाखा उपायुक्त के नियंत्रण में काम करेगी.
ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू करने के लिए वर्ष 1980 में DRDA की स्थापना की गई थी. झारखंड के 24 जिलों में DRDA के लिए कुल 1137 पद सृजित हैं, जिनमें अभी करीब 380 कर्मचारी कार्यरत हैं.
इन कर्मचारियों को महंगाई भत्ता जैसी सुविधाएं मिलती हैं और सेवानिवृत्ति की उम्र 60 वर्ष है. हालांकि, रिटायरमेंट के समय उन्हें कोई सेवानिवृत्ति लाभ नहीं मिलता. केंद्र सरकार के सुझाव के बाद राज्य सरकार ने अब इन कर्मचारियों को जिला परिषद में समायोजित करने का फैसला लिया है.