Current News : भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने झारखंड सरकार के 99 हजार करोड़ रुपये के निवेश दावे पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि सरकार दावोस में हुए पुराने निवेश समझौतों को दिल्ली में नई उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। सोमवार को प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में बीजेपी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि दिल्ली में घोषित अधिकांश निवेश प्रस्ताव पहले ही मुख्यमंत्री की दावोस यात्रा के दौरान एमओयू के रूप में तय हो चुके थे।
प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि सरकार नए निवेश लाने के बजाय पुराने समझौतों को नए पैकेज में प्रस्तुत कर प्रचार कर रही है। उन्होंने दावा किया कि 99 हजार करोड़ रुपये के घोषित निवेश का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा पहले से हुए समझौतों का ही है। उनके अनुसार, इसमें टाटा स्टील की हिसारना टेक्नोलॉजी और टिनप्लेट विस्तार परियोजना, रुंगटा संस, रुंगटा माइंस, जिंदल स्टील, अंबूजा सीमेंट और अमरगन स्टील एंड पावर प्लांट जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
न्यूक्लियर प्लांट और निवेश दावों पर भी उठाए सवाल
बीजेपी ने जिंदल के प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर भी सवाल उठाए। प्रतुल शाहदेव ने कहा कि 300 करोड़ रुपये के इस प्रस्ताव को अंतिम निवेश मानकर कुल निवेश राशि में जोड़ना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, इसे केवल निवेश की इच्छा (Expression of Interest) के रूप में देखा जाना चाहिए, क्योंकि ऐसी परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार की कई एजेंसियों और मंत्रालयों से मंजूरी आवश्यक होती है।
उन्होंने सरकार से वोल्वो इलेक्ट्रिक बस परियोजना की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने की भी मांग की। साथ ही कहा कि सरकार दावोस से लेकर दिल्ली तक हुए सभी निवेश समझौतों का रिपोर्ट कार्ड सार्वजनिक करे और बताए कि पिछले छह महीनों में कितने एमओयू पर काम शुरू हुआ, कितनी परियोजनाएं धरातल पर उतरीं और राज्य के युवाओं को कितने रोजगार मिले। उन्होंने कहा कि बीजेपी निवेश और औद्योगिक विकास के पक्ष में है, लेकिन सरकार के दावों की पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी है।