Hazaribagh News: हजारीबाग-टंडवा-सिमरिया मार्ग पर जारी सड़क जाम अब केवल स्थानीय लोगों की परेशानी नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर राज्य की ऊर्जा व्यवस्था और कोयला परिवहन पर भी साफ दिखाई देने लगा है। 10 जुलाई को शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन 11 जुलाई से पूर्ण सड़क बंदी में बदल गया, जिसके बाद इस मार्ग से कोयला ढुलाई लगभग पूरी तरह ठप हो गई है। लगातार कई दिनों से जाम के कारण सैकड़ों कोयला लदे ट्रक अलग-अलग स्थानों पर फंसे हुए हैं।
कई किलोमीटर तक ट्रकों की लंबी कतार, आम लोग भी परेशान
जाम की सबसे गंभीर स्थिति डाड़ी नो-एंट्री प्वाइंट से खधैया तक टंडवा-सिमरिया मार्ग पर बनी हुई है। वहीं सिमरिया-हजारीबाग और सिमरिया-बगरा मार्ग पर भी भारी वाहनों की लंबी कतारें लगी हैं। सड़क के दोनों ओर खड़े ट्रकों के कारण छोटे वाहन, एंबुलेंस और अन्य जरूरी सेवाओं की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है, जबकि वैकल्पिक मार्गों पर भी दबाव बढ़ गया है।
बिजली उत्पादन पर मंडराया संकट, कोयले की सप्लाई प्रभावित
इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कोयला विभिन्न ताप विद्युत संयंत्रों तक पहुंचाया जाता है, लेकिन सड़क बंद होने से आपूर्ति लगभग ठप पड़ गई है। लगातार कई दिनों से परिवहन बाधित रहने के कारण बिजलीघरों में कोयले का स्टॉक प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ सकता है।
ट्रक चालकों की मुश्किलें बढ़ीं, बुनियादी सुविधाओं का अभाव
सबसे ज्यादा परेशानी जाम में फंसे ट्रक चालकों और खलासियों को हो रही है। सुरक्षा कारणों से वे अपने वाहन छोड़कर कहीं नहीं जा सकते और कई चालक 10 जुलाई से ट्रकों में ही दिन-रात गुजार रहे हैं। भोजन, पेयजल, स्नान और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी से उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
समाधान का इंतजार, प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की मांग
सड़क जाम का असर छात्रों, मरीजों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और आम यात्रियों पर भी पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। स्थानीय नागरिकों, ट्रांसपोर्टरों और वाहन चालकों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर सड़क जाम खत्म कराने की मांग की है। उनका कहना है कि लंबे समय तक यह मार्ग बंद रहने से कोयला परिवहन, व्यापार, जनजीवन और बिजली व्यवस्था पर गंभीर आर्थिक असर पड़ सकता है।