Russia Sanctions Bill: रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों को लेकर अमेरिका ने अपनी रणनीति में अहम बदलाव किया है. अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए रूस विरोधी प्रतिबंध विधेयक के संशोधित मसौदे में पहले प्रस्तावित 500 फीसदी टैरिफ को घटाकर अधिकतम 100 फीसदी करने का प्रावधान रखा गया है. इस बदलाव से भारत और चीन जैसे देशों पर संभावित आर्थिक असर पहले की तुलना में कम हो सकता है.
ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए बदले नियम
संशोधित विधेयक का मकसद रूस पर आर्थिक दबाव बनाए रखना है, लेकिन उन देशों की ऊर्जा जरूरतों को भी ध्यान में रखना है जो अब भी रूसी तेल और गैस पर निर्भर हैं. पहले अप्रैल 2025 में पेश प्रस्ताव में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कही गई थी. अब इसे घटाकर अधिकतम 100 फीसदी करने का प्रस्ताव रखा गया है. रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं. वहीं प्राकृतिक गैस के बड़े खरीदारों में चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम का नाम है.
कुछ देशों को मिल सकती है विशेष राहत
विधेयक में ऐसे देशों को राहत देने का भी प्रावधान रखा गया है जो रूस से प्राकृतिक गैस का सीमित आयात करते हैं और धीरे-धीरे अपनी ऊर्जा निर्भरता कम कर रहे हैं. जिन देशों का रूस के कुल गैस निर्यात में हिस्सा 15 फीसदी से कम है, उन्हें राष्ट्रीय परिस्थितियों के आधार पर छूट मिल सकती है. जापान, फ्रांस, हंगरी और बेल्जियम ऐसे देशों में शामिल हो सकते हैं. इस संशोधित प्रस्ताव को अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों दलों के सांसदों का समर्थन मिला है.
शैडो फ्लीट और ऊर्जा परियोजनाएं भी निशाने पर
संशोधित विधेयक में रूस के शैडो फ्लीट पर सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव रखा गया है. यह उन जहाजों का नेटवर्क माना जाता है जिनका इस्तेमाल रूस प्रतिबंधों से बचते हुए तेल निर्यात के लिए करता है. इसके अलावा रूसी केंद्रीय बैंक समेत कई प्रमुख वित्तीय संस्थानों को भी प्रतिबंधों के दायरे में लाने की योजना है. यामल एलएनजी, आर्कटिक एलएनजी-1, आर्कटिक एलएनजी-2 और आर्कटिक एलएनजी-3 जैसी प्रमुख ऊर्जा परियोजनाओं को भी निशाना बनाया गया है. हालांकि विधेयक में अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हित के आधार पर इन प्रतिबंधों को पूरी तरह या आंशिक रूप से स्थगित या माफ करने का अधिकार देने का भी प्रावधान रखा गया है.