New Delhi: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में कथित पेपरलीक को लेकर विवाद अब संसद के मानसून सत्र में भी जोर पकड़ चुका है। लगातार दूसरे दिन लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही इस मुद्दे पर हंगामे की भेंट चढ़ी। विपक्ष ने परीक्षा में अनियमितताओं पर सरकार से जवाब मांगा, जबकि सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि केंद्र इस विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है।
पीएम मोदी ने पेपरलीक को युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय बताया
विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपरलीक को देश के युवाओं के भविष्य पर सीधा हमला बताते हुए इसे गंभीर अपराध करार दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है ताकि भविष्य में कोई भी छात्रों की मेहनत और विश्वास के साथ खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।
सरकार का कहना है कि जैसे ही परीक्षा में गड़बड़ियों की जानकारी मिली, तुरंत जांच शुरू कर दी गई। केंद्र के अनुसार मामले की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए कई सुधारात्मक कदम भी उठाए जा रहे हैं। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी सुधार प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की बात कही है।
राहुल गांधी ने छात्रों के समर्थन में सरकार को घेरा
दूसरी ओर, विपक्ष इस पूरे मामले में सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग पर अड़ा हुआ है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्रों के समर्थन में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि परीक्षा व्यवस्था में आई खामियों का जवाब सरकार को देना होगा। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने सरकार के सामने पांच मांगें रखीं
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे, संसद में तत्काल विस्तृत चर्चा, प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कदम, छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार पर प्रधानमंत्री से सार्वजनिक माफी और परीक्षा प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग शामिल है।
पेपरलीक का मुद्दा अब केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा विषय बन चुका है। सरकार जहां जांच और सुधार के जरिए भरोसा बहाल करने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष छात्रों के हितों की सुरक्षा और जिम्मेदारी तय करने की मांग को लेकर लगातार सरकार पर दबाव बनाए हुए है।