Jantar Mantar Protest: 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के बाद दर्ज मामलों को लेकर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है. सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली पुलिस को अब तक केस वापस लेने का कोई औपचारिक निर्देश नहीं मिला है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही सरकार से आदेश मिलेगा, कानूनी प्रक्रिया के तहत मामलों को वापस लेने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी.
दिल्ली पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर प्रदर्शन और उससे जुड़ी घटनाओं को लेकर अब तक करीब 20 मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें 14 एफआईआर प्रदर्शन और हिंसा से संबंधित हैं. एक मामला बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने का है, जबकि अन्य केस पत्रकारों और पुलिसकर्मियों पर हमले के आरोपों से जुड़े हैं.
एलजी की मंजूरी के बाद ही आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
जानकारी के मुताबिक, यदि सरकार केस वापस लेने का फैसला करती है तो दिल्ली पुलिस अभियोजन पक्ष के माध्यम से उपराज्यपाल को पत्र भेजेगी. इसमें अदालत में आगे कार्रवाई नहीं करने की अनुमति मांगी जाएगी. उपराज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद पुलिस संबंधित अदालत को अपनी मंशा से अवगत कराएगी. अंतिम फैसला अदालत ही करेगी कि मामलों को समाप्त किया जाए या नहीं.
हालांकि, पत्रकारों की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होंगी. ऐसे मामलों को वापस लेने के लिए संबंधित शिकायतकर्ताओं की सहमति जरूरी होगी.
सीजेपी ने केस वापसी में देरी पर उठाए सवाल
इस बीच जनता पार्टी ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं. पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को टैग करते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के आश्वासन का पालन नहीं हो रहा है.
उन्होंने दावा किया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में कई छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दिल्ली समेत अन्य राज्यों में भी प्रदर्शन से जुड़े लोगों पर नजर रखी जा रही है और उन्हें परेशान किया जा रहा है.
प्रदर्शनकारियों की सभी एफआईआर वापस लेने की मांग
आशुतोष रांका ने कहा कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की मदद करने वाले स्वयंसेवकों की गिरफ्तारी की भी खबरें सामने आ रही हैं. उन्होंने मांग की कि छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तत्काल वापस ली जाएं, गिरफ्तार लोगों को रिहा किया जाए और भविष्य में भी ऐसे मामलों में कार्रवाई न की जाए.
उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो संगठन दोबारा आंदोलन शुरू करने को मजबूर होगा. साथ ही भारत सरकार के साथ हुए समझौते और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी समयसीमा को सार्वजनिक करने की भी मांग की.