Jharkhand Urban Development: झारखंड सरकार ने शहरी क्षेत्रों में सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 154 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि को मंजूरी दे दी है. इस राशि का उपयोग नगर विकास एवं आवास विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत विभिन्न नगर निकायों के लिए करने का फैसला किया है. इसके लिए विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने आदेश भी जारी कर दिया है.
अलग-अलग योजनाओं के तहत नगर निकायों को मिलेगा बजट
अलग-अलग योजनाओं के तहत निकायों को बजट मिलेगा. ओएसपी (OSP) मद के तहत 25 शहरी निकायों को 73.96 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. एससीएसपी (SCSP) के तहत 49 नगर निकायों को 15.84 करोड़ रुपये दिए गए हैं. टीएसपी (TSP) मद में 24 शहरी निकायों के लिए 64.19 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं.
शहरों में बढ़ेंगी बुनियादी सुविधाएं
इस राशि का उपयोग शहरों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और सौंदर्यीकरण के लिए होगा. इसके तहत नई स्ट्रीट लाइट लगाई जाएंगी, पार्क बनाए जाएंगे, तालाबों और जलाशयों का ध्यान रखा जाएगा, और मुख्य चौक-चौराहों और सड़क डिवाइडरों को आकर्षक बनाया जाएगा.
इस बजट के तहत सामुदायिक सुविधाओं के निर्माण पर भी ध्यान दिया जाएगा. श्मशान घाट, नालियां, टाउन हॉल, सामुदायिक भवन, वृद्धाश्रम, रैन बसेरा, विवाह भवन और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स जैसे स्थानों का निर्माण किया जा सकेगा. सरकार का उद्देश्य शहरों में नागरिक सुविधाएं मजबूत करना और लोगों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है.
कचरा प्रबंधन और जलापूर्ति व्यवस्था को भी मिलेगा बल
कचरा प्रबंधन और जलापूर्ति व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा. इस राशि से फॉगिंग मशीन, वाटर टैंकर, टावर लैडर और अन्य आवश्यक उपकरण खरीदे जाएंगे. साथ ही पहले से चल रही जलापूर्ति योजनाओं के रखरखाव और संचालन पर भी खर्च किया जाएगा, ताकि लोगों को नियमित रूप से पेयजल मिलता रहे.
विभाग ने आवंटित राशि के उपयोग की सख्त निगरानी करने का फैसला किया है. केवल स्वीकृत योजनाओं पर इस राशि का उपयोग किया जाएगा. सभी काम निर्धारित निविदा प्रक्रिया के माध्यम से कराए जाएंगे. किसी भी योजना में दोहरा भुगतान नहीं होगा. विभाग ने सभी नगर निकायों को वित्तीय नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं.
उपयोगिता प्रमाण पत्र देना होगा अनिवार्य
सरकार के मुताबिक, सभी परियोजनाओं और खर्च से जुड़े दस्तावेजों की जांच भारतीय अंकेक्षण एवं लेखा विभाग जरूरत पड़ने पर कर सकता है. योजना पूरी होने के बाद, उपयोगिता प्रमाण पत्र महालेखाकार और नगर विकास एवं आवास विभाग को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा.