Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-07-29

Jharkhand News: झारखंड में बढ़ सकती है बाघों की संख्या, जल्द जारी होगी टाइगर एस्टीमेशन रिपोर्ट

Jharkhand News: झारखंड में बाघों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है. वन विभाग के अनुसार राज्य में टाइगर एस्टीमेशन का काम पूरा हो चुका है और इसकी रिपोर्ट जल्द जारी की जाएगी. अधिकारियों का मानना है कि नई गणना में बाघों की संख्या पहले से अधिक हो सकती है. फिलहाल पिछली गणना के अनुसार राज्य में छह बाघ हैं.
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर वन्यजीव संरक्षण का दिया गया संदेश
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में जिला वन पदाधिकारी सबा आलम अंसारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. उन्होंने बाघ संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी और युवाओं से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की.

टाइगर एस्टीमेशन रिपोर्ट से वन विभाग को अच्छी खबर की उम्मीद
मीडिया से बातचीत में सबा आलम अंसारी ने बताया कि झारखंड में टाइगर एस्टीमेशन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब रिपोर्ट का इंतजार है. उन्होंने कहा कि विभाग को उम्मीद है कि परिणाम आने के बाद राज्य में बाघों की संख्या बढ़ने की खुशखबरी मिलेगी.

उन्होंने यह भी कहा कि भारत आज बाघ संरक्षण के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बाघ संरक्षण को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है.

बाघों की मौजूदगी स्वस्थ जंगल और बेहतर पर्यावरण का संकेत
सबा आलम अंसारी ने कहा कि जिन क्षेत्रों में बाघों की संख्या अधिक होती है वहां के जंगल भी अधिक समृद्ध होते हैं और जैव विविधता सुरक्षित रहती है. उन्होंने कहा कि जंगल, वन्यजीव और पर्यावरण एक दूसरे के पूरक हैं. यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो वन्यजीवों का संरक्षण भी मजबूत होगा और पर्यावरण का संतुलन बना रहेगा.

टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क के निदेशक डॉ. नईम अख्तर ने कहा कि जल, जंगल और जमीन का संरक्षण भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत है. उन्होंने कहा कि किसी क्षेत्र में बाघों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि वहां का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ है और बाघों के लिए आवश्यक भोजन, वन्यजीव तथा हरियाली उपलब्ध है.

युवाओं की बढ़ती भागीदारी से मजबूत हो रहा संरक्षण अभियान
कार्यक्रम में अधिकारियों ने बताया कि पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण को लेकर युवाओं में पहले की तुलना में अधिक जागरूकता आई है. करीम सिटी कॉलेज, को ऑपरेटिव कॉलेज और वर्कर्स कॉलेज समेत कई शिक्षण संस्थानों के छात्र छात्राएं संरक्षण अभियानों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं.

कार्यक्रम में शामिल एक छात्रा ने बताया कि विद्यार्थियों को भारत और दुनिया में बाघों की वर्तमान स्थिति तथा उनके संरक्षण के महत्व की जानकारी दी गई. उन्होंने कहा कि अब स्कूल और कॉलेज के छात्र छात्राओं में जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर पहले से अधिक जागरूकता देखने को मिल रही है.
WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !