Chandil: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड स्थित रुचाप पंचायत के सालडीह गांव में सोमवार देर रात एक जंगली हाथी के अचानक आ धमकने से अफरा-तफरी मच गई। रात करीब 12 बजे हाथी ने बस्ती में पहुंचकर घासीराम मांझी के मिट्टी के घर पर जोरदार हमला कर दिया और दीवार व दरवाजे को तोड़कर बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। हालांकि, ऐन वक्त पर दिखाई गई सूझबूझ के कारण गृहस्वामी घासीराम मांझी की जान बाल-बाल बच गई।
दीवार टूटने की आवाज से खुली नींद, दूसरे रास्ते से भागकर बचाई जान
पीड़ित घासीराम मांझी ने बताया कि वे अपने कमरे में गहरे विश्राम में थे, तभी अचानक घर ढहाए जाने की भीषण आवाज से उनकी आंख खुली। सामने जंगली हाथी को देखकर वे तुरंत खतरे को भांप गए। मुख्य द्वार पर हाथी मौजूद था, इसलिए उन्होंने बिना वक्त गंवाए घर के पिछले रास्ते (चोर दरवाजे) से भागकर पास में रहने वाले अपने भाई के मकान में शरण ली।
खाने की तलाश में घुसा था हाथी
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, हाथी मुख्य दरवाजे को ध्वस्त कर अनाज की तलाश में अंदर दाखिल होने की कोशिश कर रहा था। घर के भीतर राशन सामग्री न मिलने पर वह कुछ देर बाद वहां से हटकर बस्ती के दूसरे हिस्से की ओर चला गया। इस घटना के बाद से पूरे सालडीह गांव में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने खौफ के साए में टॉर्च और लाठी-डंडों के सहारे रातभर जागकर पहरेदारी की।
वन विभाग से गश्त बढ़ाने और स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि चांडिल क्षेत्र में हाथियों की निरंतर आवाजाही से आए दिन जन-माल का नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों ने वन विभाग के वरीय अधिकारियों से प्रभावित इलाकों में नियमित नाइट गश्त बढ़ाने, हाथियों को सुरक्षित जंगलों की ओर खदेड़ने और मुआवजे के साथ-साथ इस समस्या का कोई ठोस व स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।