Jharkhand High Court: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के उस सर्कुलर को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू हो गई है, जिसके जरिए हिरासत में मौत, गुमशुदगी और दुष्कर्म के मामलों में अनिवार्य न्यायिक जांच की व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी. मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने याचिका पर शीघ्र सुनवाई का आग्रह स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 निर्धारित की है.
2024 के सर्कुलर को निरस्त करने की मांग
याचिका में 14 मई 2024 को जारी एनएचआरसी के सर्कुलर को रद्द करने की मांग की गई है. इस सर्कुलर के माध्यम से आयोग ने चार सितंबर 2020 का अपना पूर्व आदेश वापस ले लिया था. वर्ष 2020 के निर्देश में पुलिस या न्यायिक हिरासत में किसी व्यक्ति की मौत, गुमशुदगी अथवा दुष्कर्म की हर घटना में न्यायिक जांच कराना अनिवार्य किया गया था.
बीएनएसएस लागू होने का दिया गया था आधार
एनएचआरसी ने अपने फैसले में कहा था कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) लागू होने के बाद वर्ष 2020 का सर्कुलर प्रभावी नहीं रह गया है. इसी आधार पर आयोग ने नई व्यवस्था लागू की थी.
याचिका में कानून की गलत व्याख्या का आरोप
जनहित याचिका में दावा किया गया है कि एनएचआरसी ने बीएनएसएस की धारा 194(4) और 196(2) की गलत व्याख्या की है. याचिकाकर्ता का कहना है कि धारा 194(4) केवल कार्यपालक दंडाधिकारी को प्रारंभिक जांच (इनक्वेस्ट) करने का अधिकार देती है, जिसका उद्देश्य सिर्फ मृत्यु के प्रथमदृष्टया कारणों का पता लगाना है. इसे न्यायिक जांच का विकल्प नहीं माना जा सकता.
अब इस मामले में हाईकोर्ट 20 अगस्त को विस्तृत सुनवाई करेगा, जिस पर आगे की कानूनी दिशा तय होने की संभावना है.