Ranchi News : झारखंड विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रथम अनुपूरक बजट पर सरकार का पक्ष रखते हुए वित्त मंत्री ने राज्य की वित्तीय स्थिति, आय-व्यय और केंद्र से मिलने वाली राशि का ब्यौरा सदन में रखा। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर झारखंड के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया और केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी का मुद्दा उठाया।
1.58 लाख करोड़ का है राज्य का मूल बजट
वित्त मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए झारखंड का मूल बजट 1,58,560 करोड़ रुपये का है। इसके अलावा सरकार ने 8,399 करोड़ 31 लाख रुपये का प्रथम अनुपूरक बजट पेश किया है। उन्होंने कहा कि नई योजनाओं को लागू करने और जरूरी अतिरिक्त खर्चों को पूरा करने के लिए अनुपूरक बजट में राशि का प्रावधान किया जाता है।
केंद्र से मिलने वाली राशि को लेकर उठाए सवाल
वित्त मंत्री ने सरकार के पिछले चार महीनों के खर्च का भी ब्यौरा सदन में रखा। उनके अनुसार ग्रामीण विकास विभाग में 4,258 करोड़ 67 लाख रुपये, स्कूली शिक्षा में 971 करोड़ रुपये, गृह, कार्य एवं आपदा प्रबंधन से जुड़े मद में 490 करोड़ रुपये और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में 271 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार पर झारखंड के साथ वित्तीय भेदभाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय करों में हिस्सेदारी मिलने के बाद झारखंड को अनुदान के रूप में केवल 0.73 प्रतिशत राशि प्राप्त हुई है। उन्होंने सदन में विभिन्न राज्यों को टैक्स डेवोलेशन के तहत मिली राशि का आंकड़ा भी रखा। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश को 19,208 करोड़ रुपये, बिहार को 10,845 करोड़ रुपये, मध्य प्रदेश को 810 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र को 722 करोड़ रुपये और राजस्थान को 460 करोड़ रुपये मिले हैं। वहीं झारखंड को 360 करोड़ रुपये मिले।
राजस्व प्राप्ति 25 से 26 प्रतिशत के बीच, वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने का दावा
वित्त मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष के पहले चार महीनों में राज्य की राजस्व प्राप्ति करीब 25 से 26 प्रतिशत रही है, जबकि राजस्व खर्च लगभग 21 प्रतिशत रहा। उन्होंने दावा किया कि राज्य के वित्तीय प्रबंधन को लेकर नीति आयोग की ओर से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार झारखंड की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए राज्य के विकास और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।