Parasnath Hill Construction: पारसनाथ पहाड़ पर हुए निर्माण कार्यों को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने जांच के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने गिरिडीह उपायुक्त को खुद मौके पर जाकर निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने और यह स्पष्ट करने को कहा है कि वहां किए गए निर्माण नियमों के अनुरूप हैं या नहीं.
3 सितंबर तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश
गुरुवार को ज्योत संस्था की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने गिरिडीह DC को जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 3 सितंबर तक का समय दिया है. मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी.
पुरानी रिपोर्ट में नहीं हुई थी स्थिति स्पष्ट
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने बताया गया कि पारसनाथ पहाड़ पर निर्माण को लेकर गिरिडीह जिला विधिक सेवा प्राधिकार यानी DLSA की ओर से पहले ही रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है. हालांकि, अदालत ने पाया कि उस रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि पहाड़ पर किए गए निर्माण वैध हैं या नियमों के खिलाफ. इसी स्थिति को स्पष्ट करने के लिए अब गिरिडीह DC को स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट देने को कहा गया है.
जनहित याचिका में धार्मिक महत्व का मुद्दा
ज्योत संस्था की ओर से दाखिल याचिका में पारसनाथ पहाड़ से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता का कहना है कि पारसनाथ पहाड़ जैन धर्म के अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है. याचिका में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार की ओर से क्षेत्र को लेकर अधिसूचना जारी की जा चुकी है. याचिकाकर्ता के मुताबिक, पहाड़ पर किसी भी तरह का निर्माण या अन्य गतिविधि करते समय जैन समुदाय की धार्मिक भावनाओं और संबंधित प्रावधानों का ध्यान रखा जाना चाहिए.
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने की सुनवाई
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने की. याचिकाकर्ता की ओर से प्रदीप संचेती और अधिवक्ता शुभम कटारूका ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा. अब गिरिडीह DC की जांच रिपोर्ट के बाद पारसनाथ पहाड़ पर हुए निर्माण की वैधता को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है.