JPSC Exam Controversy: 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा रद्द होने के बाद अब सफल अभ्यर्थियों ने अपनी चिंता जाहिर की है. उनका कहना है कि अगर परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई भी हो. लेकिन पूरी परीक्षा रद्द होने से उन अभ्यर्थियों को भी नुकसान होगा, जिन्होंने मेहनत के दम पर परीक्षा पास की है.
जांच से आपत्ति नहीं, प्रक्रिया पर सवाल
सफल अभ्यर्थियों का कहना है कि वे जांच के खिलाफ नहीं हैं. उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि जांच का तरीका ऐसा हो, जिससे दोषियों की पहचान की जा सके और बाकी अभ्यर्थियों के साथ अन्याय न हो. अभ्यर्थियों के अनुसार जांच एजेंसी के पास परीक्षा से जुड़े कई रिकॉर्ड मौजूद हैं. करीब 1,800 सफल अभ्यर्थियों ने अपनी OMR शीट की कार्बन कॉपी भी जांच के लिए उपलब्ध कराई है.
रिकॉर्ड से गड़बड़ी की जांच की मांग
अभ्यर्थियों का कहना है कि OMR शीट, कार्बन कॉपी, परीक्षा केंद्रों के रिकॉर्ड और दूसरे तकनीकी सबूतों की जांच की जा सकती है. इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि परीक्षा में गड़बड़ी कहां हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे.
1.18 लाख अभ्यर्थियों ने दी थी परीक्षा
14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में करीब 1.18 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे. इनमें से 2,204 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया था. रिजल्ट आने के बाद सफल अभ्यर्थियों ने मुख्य परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी. अब परीक्षा रद्द होने के फैसले से उनकी तैयारी और आगे की योजना पर असर पड़ा है.
दोबारा परीक्षा से बढ़ेगी परेशानी
सफल अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कई साल की मेहनत लगती है. इसके साथ ही पढ़ाई पर पैसा और समय भी खर्च होता है. ऐसे में दोबारा परीक्षा होने पर उन्हें फिर से उसी तैयारी और अनिश्चितता से गुजरना पड़ेगा.
दोषियों पर कार्रवाई, बाकी को मिले मौका
अभ्यर्थियों की मांग है कि जांच तकनीकी और वैज्ञानिक तरीके से की जाए. जहां गड़बड़ी मिले, वहां जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो. उनका कहना है कि अगर कुछ अभ्यर्थी या परीक्षा केंद्र दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए. लेकिन जिन अभ्यर्थियों की भूमिका साफ है, उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए. अभ्यर्थियों का तर्क है कि किसी एक स्तर पर गड़बड़ी मिलने की स्थिति में पूरी परीक्षा रद्द करना ही एकमात्र रास्ता नहीं होना चाहिए.