FDA जांच में विमल इलायची की बिक्री पर उठे सवाल
मामले की जांच में FDA सबसे पहले यह पता करना चाहता है कि विज्ञापनों में दिखाई जाने वाली विमल इलायची वास्तव में स्वतंत्र रूप से बाजार में उपलब्ध है या नहीं. विभाग इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि कहीं इस उत्पाद के नाम और प्रचार का इस्तेमाल प्रतिबंधित विमल पान मसाला को बढ़ावा देने के लिए तो नहीं किया जा रहा है.
इसी वजह से शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ से विमल इलायची की बाजार में वास्तविक मौजूदगी और उसकी बिक्री से जुड़े प्रमाण मांगे गए हैं. FDA की जांच का अहम हिस्सा यह तय करना है कि संबंधित विज्ञापन सामान्य उत्पाद प्रचार की श्रेणी में आता है या प्रतिबंधित तंबाकू और पान मसाला के सरोगेट विज्ञापन के तौर पर देखा जाना चाहिए.
एग्रीमेंट से लेकर विज्ञापन और फीस तक मांगी जानकारी
FDA ने तीनों अभिनेताओं और उनकी टीमों से ब्रांड के साथ हुए कारोबारी समझौतों की जानकारी भी मांगी है. विभाग यह जानना चाहता है कि विज्ञापन से जुड़ने से पहले कलाकारों की टीम ने उत्पाद की कानूनी स्थिति और उसके बाजार में मौजूद होने की जांच किस स्तर तक की थी.
इसके साथ ही टीवी चैनलों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर चलाए गए विज्ञापनों से संबंधित विस्तृत जानकारी देने को कहा गया है. ब्रांड मालिकों और अभिनेताओं के बीच हुए बिजनेस कॉन्ट्रैक्ट, भुगतान और अन्य वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज भी FDA ने तलब किए हैं.
15 दिन में जवाब नहीं मिला तो हो सकती है कार्रवाई
FDA ने जांच पूरी होने तक तीनों अभिनेताओं को विमल इलायची से जुड़े नए या पुराने विज्ञापनों के प्रसारण से दूरी बनाए रखने की हिदायत दी है. नोटिस का जवाब देने और मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए अभिनेताओं को 15 दिन का समय दिया गया है.
अगर तय समय में जवाब नहीं दिया जाता है तो विभाग उपलब्ध दस्तावेज और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकता है. खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत अगर किसी विज्ञापन को भ्रामक साबित किया जाता है तो संबंधित मामले में 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.
महाराष्ट्र में प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों और पान मसाला के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच FDA ने यह कदम उठाया है. अब तीनों अभिनेताओं की ओर से दिए जाने वाले जवाब और जमा किए गए दस्तावेजों के आधार पर विभाग आगे की प्रशासनिक या कानूनी प्रक्रिया तय करेगा.