भारत के चुनाव मॉडल को ट्रंप ने बताया अमेरिका के लिए उदाहरण
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर भारत के हालिया लोकसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए वहां की चुनावी प्रक्रिया की सराहना की. उन्होंने बताया कि भारत में करीब 64.6 करोड़ लोगों ने चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. ट्रंप के मुताबिक इतनी बड़ी आबादी के मतदान के बावजूद डाक मतपत्र के जरिए वोट डालने वालों की संख्या कुल मतदान के एक प्रतिशत से भी कम रही. उन्होंने इसे भारतीय चुनाव प्रणाली की मजबूती और व्यवस्थित प्रक्रिया से जोड़ते हुए अमेरिका के लिए भी इसे सीख के तौर पर पेश किया. भारत में मतदान के लिए अधिकृत फोटो पहचान पत्र की व्यवस्था को ट्रंप ने खास तौर पर महत्वपूर्ण बताया. उनका कहना है कि चुनाव को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए मतदाता की पहचान की पुष्टि जरूरी है. व्हाइट हाउस की ओर से भी इस बहस में भारत और ब्राजील जैसे देशों की चुनावी व्यवस्थाओं का उदाहरण दिया गया है. इन देशों में मतदाता पहचान को सरकारी रिकॉर्ड या बायोमेट्रिक व्यवस्था से जोड़ने की बात कही गई है.
अमेरिका में वोटर ID को लेकर पुरानी राजनीतिक खींचतान
अमेरिका में मतदान के दौरान पहचान पत्र दिखाने की अनिवार्यता लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है. अलग-अलग राज्यों में चुनाव संबंधी कानून और मतदाता पहचान के नियम एक जैसे नहीं हैं, जिसके कारण इस मुद्दे पर दोनों राजनीतिक खेमों के बीच मतभेद बना हुआ है. ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी का तर्क है कि सख्त पहचान संबंधी नियमों से फर्जी मतदान और चुनावी गड़बड़ी की आशंका को कम किया जा सकता है. उनका जोर इस बात पर है कि मतदान का अधिकार केवल वैध अमेरिकी नागरिकों को मिले और इसके लिए दस्तावेजी प्रमाण की व्यवस्था मजबूत हो. वहीं, इन नियमों का विरोध करने वालों का कहना है कि बहुत ज्यादा सख्ती से ऐसे नागरिकों को परेशानी हो सकती है, जिनके पास निर्धारित पहचान दस्तावेज तत्काल उपलब्ध नहीं हैं. विरोधियों के मुताबिक इससे पात्र मतदाताओं के लिए मतदान करना मुश्किल हो सकता है और कुछ लोग अपने मताधिकार से वंचित रह सकते हैं. अमेरिका के कई राज्यों में फिलहाल नागरिकता की पुष्टि से जुड़े कुछ मामलों में स्व घोषणा व्यवस्था का इस्तेमाल होता है. ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इस प्रक्रिया को अधिक मजबूत और सत्यापन आधारित बनाने से मतदाता सूची में सुधार किया जा सकता है तथा चुनावी संस्थाओं के प्रति जनता का भरोसा बढ़ाया जा सकता है.
SAVE America Act पर कांग्रेस के फैसले का इंतजार
ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस से SAVE America Act को जल्द पारित करने की अपील की है. प्रस्तावित कानून का उद्देश्य संघीय चुनावों में मतदान करने वाले लोगों की नागरिकता और पहचान से जुड़े सत्यापन नियमों को अधिक सख्त बनाना है. ट्रंप का स्पष्ट रुख है कि अमेरिका में मतदान का अधिकार केवल वास्तविक नागरिकों को मिलना चाहिए. इसके लिए वह दस्तावेजी प्रमाण और मजबूत पहचान सत्यापन व्यवस्था को जरूरी मानते हैं. हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिका में राजनीतिक सहमति बनना आसान नहीं माना जा रहा है. वोटर ID और नागरिकता सत्यापन के मुद्दे पर दोनों प्रमुख दलों के बीच लंबे समय से मतभेद हैं. अब नजर अमेरिकी कांग्रेस के अगले कदम पर है. आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस SAVE America Act और मतदाता पहचान से जुड़े अन्य प्रस्तावों पर क्या रुख अपनाती है. इसी फैसले से अमेरिका की चुनावी व्यवस्था में प्रस्तावित बदलावों की दिशा भी तय होगी.