Ranchi News: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के करीब 13 साल के सफर में कई अध्यक्ष बदले, लेकिन परीक्षाओं से जुड़े विवाद, लंबित प्रक्रियाएं और नियुक्तियों को लेकर उठते सवाल खत्म नहीं हुए। 5वीं से लेकर 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा तक अलग-अलग अध्यक्षों के कार्यकाल में भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ती रही। अब 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर उठे सवालों ने एक बार फिर आयोग की परीक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है।
2013 से अब तक JPSC की कई संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाएं अलग-अलग अध्यक्षों के कार्यकाल में आयोजित और पूरी हुईं। कई परीक्षाओं की प्रक्रिया एक अध्यक्ष के कार्यकाल में शुरू हुई और दूसरे के कार्यकाल में पूरी हुई।
5वीं से 6वीं सिविल सेवा तक लंबित प्रक्रियाओं की चुनौती
जुलाई 2013 से फरवरी 2015 तक देवाशीष गुप्ता JPSC अध्यक्ष रहे। उनके कार्यकाल में 5वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ी। इसके बाद फरवरी 2015 से दिसंबर 2016 तक डॉ. डीके श्रीवास्तव अध्यक्ष रहे। उनके सामने लंबित परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने की चुनौती रही। जनवरी 2017 से नवंबर 2018 तक के. विद्यासागर अध्यक्ष रहे। इस दौरान 6वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर जोर रहा। बैकलॉग और अन्य विभागीय परीक्षाएं भी आगे बढ़ीं।
7वीं से 10वीं परीक्षा में तेजी, 11वीं से 13वीं तक पहुंची प्रक्रिया
अक्टूबर 2020 से जुलाई 2022 तक अमिताभ चौधरी के अध्यक्ष रहने के दौरान 7वीं से 10वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा की प्रक्रिया पूरी हुई। आयोग ने इस परीक्षा की पूरी प्रक्रिया 251 दिनों में पूरी करने का दावा किया था। इसके बाद सितंबर 2022 से अगस्त 2024 तक डॉ. मेरी नीलिमा केरकेट्टा JPSC अध्यक्ष रहीं। उनके कार्यकाल में 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ी और जून 2024 में मुख्य परीक्षा आयोजित की गई।
14वीं सिविल सेवा परीक्षा में विवाद ने बढ़ाई चुनौती
27 फरवरी 2025 को एल. खियांग्ते को JPSC अध्यक्ष बनाया गया। उनके कार्यकाल में 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा विवादों में आ गई। प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट, परीक्षा संचालन और संविदा एजेंसी के चयन को लेकर सवाल उठे।
विवाद बढ़ने के बाद खियांग्ते ने 22 जुलाई 2026 को अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद परीक्षा प्रक्रिया और एजेंसी से जुड़े मामलों की जांच तेज हुई। 10 अगस्त 2026 की CID कार्रवाई में भी उनका नाम सामने आया।
TDPL की भूमिका पर उठे सवाल, Boiler Inspector परीक्षा पर भी अनिश्चितता
14वीं सिविल सेवा परीक्षा के विवाद में परीक्षा संचालन से जुड़ी संविदा एजेंसी TDPL की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एजेंसी के चयन, OMR और परीक्षा संचालन से संबंधित व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
JPSC की विज्ञापन संख्या 02/2025 के तहत Boiler Inspector की भर्ती परीक्षा सितंबर 2026 में प्रस्तावित है। OMR और परीक्षा संचालन से जुड़ी व्यवस्था की जांच के बीच इस परीक्षा को लेकर भी अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
JPSC और JSSC की कई परीक्षाओं को लेकर सरकार के हालिया फैसलों के बाद अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई है। ऐसे में JPSC के सामने अब सिर्फ लंबित भर्ती प्रक्रियाओं को पूरा करने की चुनौती नहीं है। परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता कायम करना और अभ्यर्थियों का भरोसा वापस हासिल करना भी आयोग के लिए बड़ी परीक्षा बन गई है।