Ranchi News: JSSC CGL के चयनित अभ्यर्थियों का आंदोलन गुरुवार को तीसरे दिन भी जारी रहा. बड़ी संख्या में अभ्यर्थी झारखंड मंत्रालय यानी प्रोजेक्ट भवन के मुख्य गेट के सामने धरने पर बैठे रहे. अभ्यर्थी नियुक्ति रद्द करने के सरकार के फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.
प्रदर्शन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने गले में फंदा डालकर विरोध जताया. उन्होंने कहा कि नौकरी मिलने के बाद अचानक नियुक्ति रद्द होने से वे मानसिक और आर्थिक परेशानी में हैं. कुछ अभ्यर्थियों ने कहा कि अगर नौकरी वापस नहीं मिली तो वे फांसी लगाने को मजबूर होंगे.
प्रशासन ने अभ्यर्थियों को कुटे मैदान में जाकर धरना देने को कहा था. लेकिन अभ्यर्थियों ने वहां जाने से मना कर दिया. उनका कहना है कि कुटे मैदान शहर से दूर है और वहां भेजकर उनकी आवाज सरकार तक पहुंचने से रोकी जा रही है.
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे प्रोजेक्ट भवन के मुख्य गेट पर इसलिए बैठे हैं, ताकि उनकी बात सीधे सरकार और अधिकारियों तक पहुंचे. उन्होंने साफ कहा कि मांगों पर फैसला होने तक वे यहां से नहीं हटेंगे. अभ्यर्थियों के अनुसार JSSC CGL की पहली परीक्षा जनवरी 2024 में हुई थी. परीक्षा में गड़बड़ी और दूसरी समस्याओं के आरोप सामने आने के बाद इसे रद्द कर दिया गया था. इसके बाद सितंबर 2024 में दोबारा परीक्षा हुई.
दूसरी परीक्षा को लेकर भी विवाद हुआ और मामला हाई कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. अभ्यर्थियों का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया के बाद नियुक्ति की राह साफ हुई. 31 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री की ओर से चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी दिए गए.
करीब सात महीने नौकरी करने के बाद बढ़ी परेशानी
चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि नियुक्ति के बाद उन्होंने करीब सात महीने तक सरकारी विभागों में काम किया. अब अचानक उनकी नियुक्ति खत्म कर दी गई है. इससे उनके सामने फिर से नौकरी और भविष्य का संकट खड़ा हो गया है. अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार अब दोबारा परीक्षा देने की बात कर रही है. लेकिन कई चयनित अभ्यर्थियों की उम्र अब तय सीमा के करीब पहुंच गई है या उससे ज्यादा हो चुकी है. ऐसे में दोबारा परीक्षा देना उनके लिए आसान नहीं है.
परिवार की जिम्मेदारी भी नौकरी पर निर्भर
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्होंने इस नौकरी के लिए कई साल तक तैयारी की थी. नौकरी मिलने के बाद परिवार की कई जिम्मेदारियां भी इसी कमाई से जुड़ गई थीं. अब नियुक्ति खत्म होने से उनके सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है. अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार नियुक्ति रद्द करने का फैसला वापस ले और पहले से चयनित अभ्यर्थियों को नौकरी में बहाल करे. उनका कहना है कि जब तक सरकार की ओर से कोई ठोस फैसला नहीं आता, तब तक प्रोजेक्ट भवन के मुख्य गेट पर उनका आंदोलन जारी रहेगा.