Jharkhand News: झारखंड की राजधानी रांची की सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के हेसाहातु गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां एक बंद कमरे में मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती जलाकर सो रहे परिवार के चार सदस्य जहरीले धुएं की चपेट में आ गए. कमरे में ऑक्सीजन का स्तर कम होने और दम घुटने से चारों अचेत हो गए. प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए इनमें से तीन लोगों को लाइफ सपोर्ट यानी वेंटिलेटर पर रखा गया है.
खिड़की-दरवाजे बंद कर सोया था परिवार
मिली जानकारी के मुताबिक, गुरुवार रात अशोक दत्ता अपनी पत्नी लक्ष्मी , बेटी ब्यूटी और बेटे महावीर के साथ भोजन करने के बाद कमरे में सोने गए थे. मच्छरों से बचने के लिए उन्होंने कमरे में अगरबत्ती सुलगा दी लेकिन साथ ही दरवाजे-खिड़कियां भी अंदर से पूरी तरह बंद कर दिया, जिससे रातभर कमरे में धुआं भरता रहा और दम घुटने से सभी सदस्य धीरे-धीरे अचेत हो गए.
देर सुबह तक परिवार में हलचल न होने पर पड़ोसियों द्वारा दरवाजा खोला गया
अगली सुबह करीब 9 बजे तक जब घर में कोई हलचल नहीं हुई और दरवाजा नहीं खुला, तो आसपास के लोगों को किसी अनहोनी की शंका हुई. पड़ोसियों ने काफी देर तक दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद 12 वर्षीय बेटे महावीर ने किसी तरह हिम्मत जुटाकर दरवाजा खोला. अंदर का नजारा देख ग्रामीण दंग रह गए; परिवार के बाकी तीनों सदस्य बेसुध पड़े हुए थे.
तीन सदस्यों की हालत गंभीर, हालांकि बेटा खतरे से बाहर बताया जा रहा है
ग्रामीणों की मदद से सभी को तत्काल झालदा स्थित सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया. वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज देने के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए मुरी के सिंगपुर नर्सिंग होम रेफर कर दिया. इलाज के दौरान 12 वर्षीय महावीर को होश आ गया है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है. हालांकि, शरीर में ऑक्सीजन का स्तर काफी कम हो जाने के कारण अशोक दत्ता, उनकी पत्नी लक्ष्मी और बेटी ब्यूटी को वेंटिलेटर पर रखा गया है.