JPSC Controversy: 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि छात्रों को कोर्ट के फैसले का सम्मान है. लेकिन भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और पारदर्शिता को लेकर उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है.
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल की मौजूदगी नहीं थी. साथ ही CID की जांच रिपोर्ट को भी कोर्ट के सामने प्रभावी तरीके से नहीं रखा गया. उनका कहना है कि इन बातों से छात्रों के मन में सरकार की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं.
मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो फिर आंदोलन
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि अगर सरकार ने छात्रों की मांगों को नजरअंदाज किया या पूरे मामले को दबाने की कोशिश की, तो छात्र फिर सड़क पर उतरेंगे. उन्होंने साफ किया कि आंदोलन का मकसद किसी योग्य अभ्यर्थी की नौकरी छीनना नहीं है. छात्र भर्ती प्रक्रिया में पेपर लीक, कथित धांधली, गड़बड़ी और पारदर्शिता की कमी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं.
उनका कहना है कि सरकारी भर्ती की प्रक्रिया पूरी तरह साफ और निष्पक्ष होनी चाहिए. मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होना चाहिए.
16 दिन तक चला अनशन
देवेंद्र नाथ महतो के अनुसार, छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर लंबे समय तक आंदोलन किया. आंदोलन के दौरान छात्रों ने 16 दिनों तक अनशन भी किया. इसके बावजूद उनकी कई मांगों और सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिला. अब छात्रों की नजर हाईकोर्ट में होने वाली आगे की सुनवाई और राज्य सरकार के अगले कदम पर है.
महतो ने कहा कि अगर छात्रों को न्याय मिलने की उम्मीद पूरी नहीं हुई, तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जा सकता है. उन्होंने दोहराया कि छात्रों की लड़ाई किसी निर्दोष या योग्य अभ्यर्थी के खिलाफ नहीं है. उनकी मांग है कि सरकारी भर्ती में नियमों का सही तरीके से पालन हो. पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो और योग्य उम्मीदवारों को उनका अधिकार मिले.