Jharkhand News: झारखंड में JPSC परीक्षा में कथित अनियमितता का मामला एक बार फिर चर्चा में है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने CID की जांच पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की है. मरांडी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मामले में CBI जांच के लिए सहमति देने की अपील की है. उनका कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए.
CID की जांच पर उठाया सवाल
बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि CID की जांच में अभय तिवारी के पिता के दो परीक्षाओं में सफल होने की बात सामने आई. लेकिन उनके मुताबिक, जांच में यह भी पता चला कि अभय तिवारी के पिता की मृत्यु वर्ष 2018 में ही हो चुकी थी. मरांडी ने इसी बिंदु को लेकर CID की जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि ऐसे तथ्य सामने आने के बाद जांच पर भरोसा कैसे किया जा सकता है.
साक्ष्यों को लेकर भी लगाया आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि पहली जांच के दौरान मिले अहम साक्ष्यों को पुलिस अधिकारी अनुराग गुप्ता अपने साथ ले गए थे. मरांडी ने खबरों के हवाले से यह भी दावा किया कि अब बचे हुए खुले साक्ष्य भी पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते अपने साथ ले गए हैं.
डिजिटल साक्ष्य मिटने की जताई आशंका
मरांडी ने कहा कि जांच में देरी होने से मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्य नष्ट होने का खतरा है. उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि CID के पास मौजूद बचे हुए साक्ष्यों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ न हो. उन्होंने आशंका जताई कि अगर CBI जांच अदालत के आदेश के बाद ही शुरू होती है और तब तक जरूरी साक्ष्य खत्म हो जाते हैं, तो जांच प्रभावित हो सकती है.
मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी पर भी सवाल
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि देरी का असर मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी और चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि छात्रों और बेरोजगार युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मामले में सच्चाई सामने आना जरूरी है. उनके मुताबिक, जांच में साक्ष्यों को सुरक्षित रखना और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करना सरकार की जिम्मेदारी है.
CBI जांच को बताया उचित विकल्प
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका के मामले में CBI जांच के लिए सहमति देने की मांग की है. उन्होंने कहा कि JPSC परीक्षा में कथित अनियमितता की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है. मरांडी ने CBI जांच को इसके लिए उचित विकल्प बताया है.