क्या था पूरा मामला
यह मामला गोड्डा के मेहरमा इलाके में जमीन अधिग्रहण से जुड़ा था. अशोक कुमार साह और कुछ अन्य ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी. उन्होंने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी.
30 दिन में आपत्ति देने का था नियम
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की बेंच ने मामले की सुनवाई की. कोर्ट ने बताया कि रेलवे ने 29 अगस्त 2025 को जमीन अधिग्रहण के लिए शुरुआती नोटिस जारी किया था.नियम के अनुसार प्रभावित लोगों को नोटिस के 30 दिनों के अंदर अपनी आपत्ति देनी थी. लेकिन याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि उन्होंने तय समय में सही अधिकारी के पास अपनी आपत्ति दी थी.
ग्रामीण रेल लाइन का रास्ता बदलना चाहते थे
ग्रामीणों ने एसआरटी कॉलेज धमरी के पास रेल लाइन का रास्ता बदलने की मांग की थी. उनका कहना था कि लाइन को 400 से 750 मीटर पूरब की ओर कर दिया जाए. इससे कम लोगों के घर और जमीन प्रभावित होने की बात याचिका में कही गई थी.
रेल लाइन का रास्ता तय करना रेलवे का काम
हाईकोर्ट ने कहा कि रेल लाइन का रास्ता तय करना तकनीकी विशेषज्ञों का काम है. इस तरह के तकनीकी फैसले में अदालत दखल नहीं दे सकती. हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर रेलवे को ग्रामीणों का सुझाव सही और व्यावहारिक लगता है, तो वह उस पर विचार कर सकता है. फिलहाल हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद गोड्डा पीरपैंती रेल लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर इस याचिका के कारण कोई रोक नहीं है.